दिल्ली निजामुद्दीन मरकज के मौलाना शौकत साहब ने कहा कि किसी के आगे हाथ में मत फैलाओ। मांगना है तो सिर्फ खुदा से मांगों। अपने ईमान को पुख्ता करो। दूसरों की मदद करो। कोई ऐसा काम न करो, जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे। इससे पहले फज्र की नमाज के बाद तारिक नदीम ने लोगों से अपने अंदर की कमी को निकालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कारोबार करते समय ध्यान रहे कि किसी सामान को कम न तौल कर दें। बल्कि तराजू का पलड़ा झुकता हुआ तौले। कारोबार में हमेशा सच बोले। झूठ बोलना, कम तौलना गुनाह है। इससे परहेज करें। कारोबार में कसमें न खाएं। अपना माल बेचे, ईमान न बेचें।
12:40 बजे मौलाना शौकत साहब ने दुआ कराई। जिसमें सभी ने मुल्क व कौम की तरक्की, अमन-चैन, भाईचारे की दुआ की। अकीदतमंदों के सेहतमंद रहने और जाने-अनजाने में हुई गलतियों की भी माफी की खुदा से दुआ की गई। इस मौके पर मुफ्ती अजमल, मोहम्मद आलम, नदीम जिगर, हाजी अनवार, राशिद गफूर, तारिक नदीम, मुफ्ती इब्राहिम, मौलाना आसिम, हबीब फुरकान आदि मौजूद रहे।
दीन को सीखने के लिए अल्लाह के रास्ते पर निकलें : मुफ्ती अफ्फान- दुआ से पहले सुबह 9:30 बजे से तालीम शुरू हुई। मुफ्ती अफ्फान कासमी ने मुंतकब हदीस की तालीम कराई। जिसमें उन्होंने अकीदतमंदों से अल्लाह की रास्ते में निकलने की अपील की। इसके बाद दिल्ली निजामुद्दीन मरकज के मुर्सलीम ने तबलीगी छह वसूलों ईमान, नमाज, इल्म और जिक्र, इकराम-ए-मुस्लिम, इखलासे नियत, अल्लाह के रास्ते में निकलना पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि सहाबा का ईमान, वजूद पहाड़ों की तरह था। हमारा ईमान बहुत कमजोर है। नमाज का जिक्र करते हुए कहा कि यह अल्लाह के खजानों से लेने का बेहतरीन जरिया है। इल्म और जिक्र पर कहा कि हमारा अल्लाह चाहता है कि हम इल्म वाले बनें। उसे हासिल करें। अल्लाह का जिक्र करें उसे हर वक्त याद रखें। इखलास-ए-नियत के तहत हमें हर काम अल्लाह की रजा के लिए करना चाहिए। जो काम अल्लाह की रजा के लिए होगा वही कल कयामत में काबा-ए-कबूल होगा। दीन को सीखने के लिए अल्लाह के रास्ते में निकलें।
इज्तिमा से 45 जमाते दूसरे शहरों के लिए निकलीं
इज्तिमा में शहर के कुछ मोहल्लों समेत जिले के विभिन्न कसबों से 45 जमाते दूसरे शहरों में दीन सीखने व बेदीन लोगों से दीन को जानने का संदेश देने के लिए रवाना हुईं। जिनकी गुलपोशी कर इस्तकबाल किया गया। मुफ्ती अफ्फान कासमी ने नेक करने समेत कई हिदायतें दीं। कहा कि जहां भी जाएं वहां की मस्जिद में जाकर इबादत करें। अगर वहां कुछ बेदीन मिलें तो उनमें दीन लाने की कोशिश करें। अपने कुरान की तिलावत करें। ट्रेन में हो तो किसी बुजुर्ग का सामान उतरवा दें। कोई बुजुर्ग या महिला अगर खड़ी दिखे तो उसे सीट दे दें। ट्रेन में जाते समय हर वह काम करें जिससे किसी दूसरे को कोई परेशानी न हो।
वालिंटरों ने खुद संभाली यातायात व्यवस्था
रविवार इज्तिमा में हुई दुआ में शामिल होने के लिए शहर समेत जिले के विभिन्न स्थानों से सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। ताजपुर की ओर से कार्यक्रम स्थल पहुंचने वाले लोगों के वाहन ताजपुर में ही और शहर की जामा मस्जिद पुल से होकर जाने वाले लोगों के वाहन जामा मस्जिद पार्क, जीआईसी चौक आदि स्थानों पर ही खड़ा करा दिए गए। भीड़ के कारण कार्यक्रम स्थल के दोनों ओर करीब एक किमी पहले ही लोगों को अपने वाहन खड़े कर कार्यक्रम स्थल तक पैदल ही पहुंचना पड़ा। अकीदतमंदों में से ही कुछ वालिंटरों ने सभी जगह यातायात व्यवस्था संभाल रखी थी।
कोई इत्र लगा रहा था, कोई हलवा खिला रहा था
इज्तिमा की दुआ में पहुंचने वाले हजारों अकीदतमंदों के लिए सड़क किनारे 100 से अधिक लोगों ने पंडाल लगा कर दुआ में शामिल होने पहुंचे लोगों की खिदमत की। कोई अकीदतमंदों को इत्र लगा रहा था तो कोई चाय पिला रहा था। कोई हलवा खिला रहा था तो कोई पानी पिलाकर खिदमत कर रहा था। इसके अलावा जगह-जगह लोगों ने साइकिल, कार आदि वाहन के लिए स्टैंड बनाकर लोगों के वाहन अपने यहां खड़े किए।