मुरादाबाद। सिविल लाइंस क्षेत्र में छुट्टा सांड़ के हमले में बुजुर्ग की मौत के बाद अब पुराने शहर के इलाकों में भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंडी चौक, कटघर, गलशहीद, जामा मस्जिद और दीवान का बाजार जैसे इलाकों में छुट्टा पशुओं का आतंक इस हद तक बढ़ गया है कि लोग शाम ढलते ही गलियों में निकलने से डरने लगे हैं।
स्थिति यह है कि नगर निगम की ओर से इन छुट्टा जानवरों को पकड़ने का कोई नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा है जबकि निगम नियमित कार्रवाई करने का दावा करता है।
मंडी चौक के रहने वाले नितीश अग्रवाल, सोनू, उबनीत सिंह, आरसी सैनी आदि का कहना है कि छुट्टा सांड़, गायें और आवारा कुत्ते रोजाना सड़कों पर घूमते रहते हैं। कई जगहों पर ये झुंड बनाकर लोगों पर झपटते हैं, दुकानें पलट देते हैं और राहगीरों को घायल कर देते हैं। निगम की टीम तभी पहुंचती है जब शिकायत की जाती है। निगम अगर रोजाना अभियान चलाकर इन छुट्टा पशुओं पर कार्रवाई करे तो स्थिति कुछ ठीक हो लेकिन ऐसा कोई भी अभियान नहीं चलता है।
नगर निगम के सदन में नेता विपक्ष अनुभव मेहरोत्रा का कहना है कि सिर्फ फाइलों पर अभियान चल रहा है। पुराने शहर के करीब हर मोहल्ले में छुट्टा पशुओं की समस्या विकराल हो चुकी है। निगम तब हरकत में आता है जब हादसा हो जाता है।
जनता की शिकायत पर टीम भेजना समाधान नहीं बल्कि जवाबदेही से बचना है। वहीं पार्षद देशरत्न कात्याल ने कहा कि आवारा कुत्तों और छुट्टा पशुओं की समस्या दोनों ही गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि निगम की टीम कभी-कभार शिकायत मिलने पर कार्रवाई करती है पर यह स्थायी समाधान नहीं है। जब तक इस पर विशेष अभियान लगातार नहीं चलेगा तब तक गलियों से सांड और आवारा कुत्तों का हटना मुश्किल है।
पार्षदों ने अनुमान जताते हुए कहा कि पुराने शहर में ही करीब 30 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं जबकि छुट्टा पशुओं की भी संख्या हजारों में है। निगम की ओर से नियमित रूप से अभियान चलाने पर ही इसपर काबू पाया जा सकता है वरना ऐसे हादसों के बाद सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा सकेगी।
पार्षदों के अनुसार छुट्टा पशुओं की वजह से कई हादसे हो चुके हैं जिसमें राहगीरों को गंभीर रूप से चोटें भी लग चुकी हैं। पिछले सप्ताह ही मंडी चौक के मुख्य चौराहे पर एक बाइक सवार पर भी सांड ने हमला कर दिया था जिसमें वह गिरकर चोटिल हो चुका था। इस तरह की घटनाएं मुख्य बाजार में आम हैं।