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Moradabad News: नौ से 13 की उम्र में शुरू कराएं बच्चों का कोलेस्ट्राॅल टेस्ट

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मुरादाबाद। अगर आपका बच्चा भी रात को देर तक जागता है और सुबह देर से उठता है। बाहर दोस्तों के साथ खेलने के बजाय मोबाइल पर गेम खेलता है। घर का सामान्य खाना नहीं खाता, लेकिन जंक फूड मन से खाता है। सीढ़ियां चढ़ने में उसकी सांस फूल जाती है, तो सावधान हो जाएं। बच्चों में मोटापे के कारण हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि नौ से 13 साल की उम्र में बच्चों में कोलेस्ट्राॅल की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं।
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शहर के फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक विभिन्न वजहों से ओपीडी में आने वाले 10.4 फीसदी बच्चे मोटापे के शिकार हैं। माता-पिता उन्हें सिर दर्द, सांस फूलना व सीने में दर्द की परेशानी बताते हैं। चेकअप करने पर पता चलता है कि बच्चे का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, उसे हाइपरटेंशन होने लगा है। डॉक्टरों के पास ऐसे भी केस आए हैं, जब ज्यादा वजन के कारण छह साल की बच्ची में टाइप टू डायबिटीज पाई गई। 12 साल के बच्चे का वजन 90 किलो पाया गया। वेट मैनेजमेेंट के बाद इन बच्चों की समस्या दूर हो गई।
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क्या होता है लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग मेहरोत्रा के मुताबिक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट खून में मौजूद वसा और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बताने वाली जांच है। यह टेस्ट, हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी जानकारी देता है। इस टेस्ट से फैटी लीवर या पैंक्रियाटाइटिस जैसी समस्याओं के बारे में भी पता चल जाता है। नौ से 13 साल की उम्र के बीच यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसके बाद 18 साल की उम्र के बाद हर पांच साल पर कराना चाहिए।
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मोटापे के कारण बच्चों को इन बीमारियों का खतरा
- दिल की बीमारियां, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, शुगर, हाइपरटेंशन, हड्डियों से जुड़ी बीमारियां, फैटी लिवर, नींद न आना

डॉक्टरों की सलाह
- बच्चों के सोने व खाने का समय निर्धारित करें।
- रात 10 बजे तक हर हाल में सुला दें।
- मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करने दें।
- दोस्तों के साथ खेलने या साइकिलिंग की आदत डालें।
- फास्ट फूड की बजाय घर पर बना वेजिटेबल सूप दें।
- मैदा व चीनी के उत्पादों का सेवन कम करने दें।

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बच्चों में मोटापा दिल की बीमारियों का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है। मोटापे की वजह से ब्लड प्रेशर और नसों पर सूजन बढ़ने लगती है। यह दोनों ही फैक्टर्स दिल की बीमारियों का कारण हैं और कम उम्र में होने वाले हार्ट अटैक की वजह बनते हैं।
- डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, कार्डियोलॉजिस्ट
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मोटापे के कारण ही छह साल की बच्ची में टाइप-टू डायबिटीज मिली है। फास्ट फूड खाने, मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने व एक्सरसाइज न करने का यह असर है। बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए उनकी हर दिन साइकिल चलाने की आदत डलवाएं।
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- डॉ. सय्यद मो. रजी, एंडोक्रोनोलॉजिस्ट
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