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Moradabad News: श्रीनगर, आजाद नगर, हरिहर कॉलोनी... नाम बेहतर, हालात बदतर

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मुरादाबाद। लाइनपार में कॉलोनियों के नाम सुनने में भले ही शहर की पॉश बस्तियों जैसे लगे लेकिन गलियों में पहुंचते ही तस्वीर बदल जाती है। श्रीनगर, आजाद नगर और हरिहर कॉलोनी में कहीं सड़क अधूरी है तो कहीं रास्ता कच्चा है। नालियों का निर्माण न होने से घरों का पानी गलियों में बहता है। कई जगह बारिश के बाद कीचड़ और जलभराव से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
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श्रीनगर की गलियों में कई स्थानों पर सड़क के नाम पर उखड़ी और ऊबड़-खाबड़ सतह दिखाई देती है। पड़ोस में वर्षों से खाली पड़ी सूत मिल की जमीन अब जंगल में तब्दील हो गई है। बरसात में यहां से सांप लोगों के घरों में आ जाते हैं। गलियों में कीचड़ हो जाती है। दोपहिया वाहन संभालकर निकालने पड़ते हैं। आजाद नगर में नाली नहीं होने से गंदा पानी रास्ते के किनारे जमा रहता है। हरिहर कॉलोनी की कई गलियों में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। स्ट्रीट लाइट न होने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को निकलने में परेशानी होती है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन इलाकों में लोगों के घर तो बन गए, लेकिन बुनियादी सुविधाएं पीछे छूट गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क, नाली और रोशनी की मांग कई बार उठाई गई, मगर समस्या जस की तस है। लाइनपार की दूसरी बस्तियों में भी सड़क, जलनिकासी और प्रकाश व्यवस्था को लेकर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। रात में अंधेरी गलियों में दुर्घटना का डर रहता है। बारिश में कीचड़ और पानी के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर नौकरीपेशा लोगों तक को परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि विकास की बातें मुख्य सड़कों तक सीमित न रहकर गलियों तक भी पहुंचनी चाहिए। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि लोगों की समस्या का जल्द समाधान कराएंगे।
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लोगों के कोट्स (फोटो)
श्रीनगर की गली में सड़क की हालत लंबे समय से खराब है। बरसात में कीचड़ हो जाता है और बच्चे स्कूल जाते समय कपड़े खराब कर लेते हैं। बुजुर्गों को पैदल निकलने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। कई बार समस्या बताई, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। -रोशनी
आजाद नगर में नाली नहीं होने की वजह से घरों का पानी सड़क के किनारे जमा रहता है। बारिश होने पर हालत और खराब हो जाती है। पानी निकलने में कई दिन लगते हैं। गंदे पानी के कारण मच्छर भी बढ़ते हैं और घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। -विजय कुमार
हरिहर कॉलोनी की कई गलियों में स्ट्रीट लाइट नहीं लगी हैं। शाम के बाद महिलाएं और बुजुर्ग अकेले निकलने से बचते हैं। बच्चों को भी बाहर भेजने में डर लगता है। नगर निगम को कम से कम उन गलियों में पहले रोशनी की व्यवस्था करनी चाहिए, जहां आबादी ज्यादा है। -सीमा
हमारे यहां सड़क और नाली दोनों की जरूरत है। बारिश के दिनों में पानी सड़क पर भर जाता है और कीचड़ के कारण पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। कई जगह वाहन भी फिसलते हैं। कॉलोनी में रहने वाले लोगों को रोज इसी समस्या से होकर गुजरना पड़ता है। -अंजलि वर्मा
कॉलोनी में मकान लगातार बनते गए, लेकिन सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था उसी हिसाब से नहीं हुई। टैक्स और दूसरे खर्च लोग करते हैं, लेकिन बदले में मूलभूत सुविधाओं के लिए भी अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। गलियों का विकास जरूरी है। -पुष्पा
मुख्य मार्ग पर सड़क और रोशनी दिखाई देती है, लेकिन अंदर की गलियों में पहुंचते ही हालात अलग हैं। अधिकारी एक बार इन कॉलोनियों में पैदल घूमकर देखें तो समस्या खुद समझ में आ जाएगी। लोगों को आश्वासन नहीं, सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट की जरूरत है। -विजयपाल
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