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Moradabad News: सपा का वर्चस्व टूटा, कुंदरकी में 31 साल बाद खिला कमल

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मुरादाबाद। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद उपचुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर सपा का वर्चस्व टूट गया। सपा के गढ़ में भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह ने मुस्लिम मतों में सेंध लगाकर 31 साल बाद कमल खिला दिया। रामवीर सिंह ने तीन बार के विधायक सपा प्रत्याशी हाजी रिजवान को 1,44,791 मतों के बड़े अंतर से हराया। सभी को चाैंकाते हुए चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) बसपा को पछाड़कर तीसरे स्थान पर रही।
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जियाउर्रहमान बर्क के सांसद बनने के बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई कुंदरकी विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को मतदान हुआ था। उपचुनाव में 3.84 लाख मतदाताओं के सामने भाजपा-सपा समेत 12 प्रत्याशी मैदान में थे। करीब 2.22 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था। शनिवार को सुबह आठ बजे मंडी समिति परिसर में मतगणना शुरू हुई।
पहले ही राउंड से भाजपा प्रत्याशी द्वारा बनाई गई बढ़त आखिरी राउंड तक बरकरार रही। भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह को 1,70,371 वोट मिले, जो कुल मतदान का 76.54 प्रतिशत रहा। दूसरे स्थान पर रहे सपा प्रत्याशी हाजी रिजवान को सिर्फ 25,580 मतों से संतोष करना पड़ा।
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तीसरे स्थान पर रहे आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार चांदबाबू को 14,201, एआईएमआईएम के प्रत्याशी मोहम्मद वारिस को 8,111 और बसपा प्रत्याशी रफतउल्ला को महज 1,099 वोट मिले। बाकी सात उम्मीदवारों के मतों का आंकड़ा चार अंकों में नहीं पहुंच सका। इनमें से छह प्रत्याशियों को नोटा से भी कम मत मिले। विजेता बने भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह के अलावा अन्य सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। भाजपा को कुंदरकी सीट पर इससे पहले 1993 में चंद्र विजय सिंह ने जीत दिलाई थी।
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दो बार हारे, तीसरी बार में रिजवान को दी करारी शिकस्त
कुंदरकी उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार रामवीर सिंह और सपा प्रत्याशी हाजी रिजवान के बीच तीसरी बार सियासी जंग हुई। इससे पहले दोनों उम्मीदवार 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में आमने-सामने आ चुके थे। इन दोनों चुनावों में रिजवान ने रामवीर सिंह को शिकस्त दी थी। रिजवान से दो बार हार के बाद रामवीर सिंह को तीसरी बार में बंपर जीत मिली।


ढाई साल में रिजवान की दूसरी हार
सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान की कुंदरकी विधानसभा सीट पर ढाई साल में यह दूसरी हार है। 2022 के विधानसभा चुनाव वह बसपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में भी उन्हें हार मिली थी और अब उपचुनाव में भी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इससे पहले हाजी रिजवान 1996 और 2007 का विधानसभा चुनाव भी हार चुके हैं। वह 2002, 2012 और 2017 का चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं।
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