सोशल मीडिया पर अनजान लोगों को मित्र न बनाएं, अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल न उठाएंं, लॉटरी या फ्री रीचार्ज वाले लिंक न खोलें, पुलिस की किसी भी प्रकार की सहायता के लिए 112 मिलाएं। जागरूकता की ऐसी कई बातें एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया ने छात्रों को समझाईं।
मौका था अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बोनी एनी पब्लिक स्कूल में आयोजित पुलिस की पाठशाला का। एसपी सिटी इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से कहा कि कक्षा के सिलेबस के अलावा जिंदगी में जागरूकता का सिलेबस भी बहुत मायने रखता है, जोकि जीवन में आपको किसी भी अपराध का शिकार होने से बचाता है। उन्होंने छात्राओं को महिला हेल्पलाइन 1090 के बारे में भी बताया। ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। साथ ही हर परिस्थिति को अपने माता-पिता से साझा करने की सलाह भी दी। विद्यार्थियों ने एसपी सिटी से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। आयोजन में विद्यालय की प्रधानाचार्य सुमित्रा भटनागर व शिक्षकों का सहयोग रहा।
सवाल : ट्रैफिक लाइट पर लोग पूरी सड़क घेरकर खड़े हो जाते हैं, बाएं जाने वाले वाहनों को भी जगह नहीं देते। चौराहे पर खड़े पुलिसकर्मी उन्हें कुछ नहीं कहते।
जवाब : हमारे शहर में सड़के उतनी चौड़ी नहीं हैं, जितनी ट्रैफिक लाइट के नियमानुसार होनी चाहिए। कई चौराहों पर बने गोल चक्कर भी बाधक हैं। फ्री लेफ्ट के मामले में ट्रैफिक पुलिस के जवानों के निर्देशित करेंगे। लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझें।
सवाल : क्या इमरजेंसी में रेड लाइट क्रॉस कर वाहन निकाला जा सकता है। विषम परिस्थिति में भी किया पुलिस चालान काटेगी।
जवाब : सिर्फ एंबुलेंस को अधिकार है कि ड्राइवर उसे रेड लाइट क्रॉस करके निकाल सकता है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को समस्या है तो वह वहां तैनात पुलिसकर्मी को बताकर अपील कर सकता है।
सवाल : सड़क पर, गली मोहल्लों में लोग बिना किसी की परवाह किए आपस में लड़ते रहते हैं। इससे कई बार दूसरे लोगों को परेशानी होती है। ऐसे मामलों में क्या करना चाहिए।
जवाब : आप बिना डरे 112 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दे सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका नाम गोपनीय रखा जाए तो भी पुलिस आपका सहयोग करेगी।
सवाल : क्या पेट्रोल बाइक को इलेक्ट्रिक बाइक में तब्दील करने पर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।
जवाब : किसी भी वाहन में मॉडिफिकेशन बिना आरटीओ की सहमति के मान्य नहीं है। ई-वाहनों के लिए अलग नियम बने हैं।
सवाल : स्कूल से घर जाते समय लड़के पीछा करते हैं, टिप्पणी करते हैं। ऐसे मामलों में क्या करना चाहिए।
जवाब : पुलिस महिला व बाल अपराधों के खिलाफ बहुत गंभीर है। यदि ऐसा होता है तो आप 112 या 1090 डायल कर फौरन इसकी सूचना दें। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो अपने माता-पिता को बताएं। ऐसे मामलों में अपराधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।
सवाल : 18 वर्ष से कम उम्र वाले अपराधियों को सख्त सजा क्यों नहीं मिलती। उनके लिए नियम अलग क्यों हैं।
जवाब : ऐसा माना जाता है कि 18 साल से पहले व्यक्ति का दिमाग परिपक्व नहीं होता। उन्हें भविष्य में अपराधी बनने से बचाने के लिए बाल सुधार ग्रह में रखा जाता है, जहां काउंसिलिंग की जाती है।