मुरादाबाद। तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव परंपरा के अंतिम दिन शुक्रवार को तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम सियाराम की भक्ति के रस में सराबोर हो गया। भरतनाट्यम और ओडिसी की मशहूर नृत्यांगना पद्म विभूषण राज्यसभा सांसद डॉ. सोनल मान सिंह और उनकी टीम ने सियाराम की कथा की अद्भुत प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि यूपी के पंचायती राज कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह, टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, जीवीसी मनीष जैन, उच्चतर शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. हरवंश दीक्षित, नगर विधायक रितेश गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया।
इसके बाद डॉ. सोनल मान सिंह और उनकी टीम ने न सिर्फ भगवान श्रीराम के चरित्र को नाटक के जरिये जीवंत किया बल्कि संगीत, नृत्य और भाव के मोती पिरोकर ऑडिटोरियम में भक्ति की लौ जला दी। ‘कथा सियाराम की’ का मंचन करते समय उनके चेहरे पर दृश्य के अनुसार करुणा, क्रोध, प्रेम, हास्य जैसे भाव दर्शकों को मुग्ध कर रहे थे।
कथा की शुरुआत राजा दशरथ की ओर से कराए गए पुत्रकामेष्ठी यज्ञ के उल्लेख से हुई। चारों भाइयों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के चरित्र को दर्शाया गया। अवध में जन्मे राम सलोना... बधाई गीत के जरिये डॉ. सोनल मान सिंह के शिष्यों की टोली ने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। डॉ. सोनल कभी शिक्षिका की तरह युवाओं को राम चरित्र आत्मसात करने के लिए प्रेरित करतीं तो कभी नृत्यांगना बन श्रीराम की भक्ति में लीन होकर कथा का रसपान करातीं। बीच-बीच में कभी गद्य, कभी पद्य, कभी सुर, कभी ताल के जरिये उन्होंने शब्दों में कथा को बखूबी पिरोया।
उन्होंने भगवान राम के बालरूप की सुंदरता का बखान किया। श्रीराम के जीवन की घटनाओं जैसे गुरु विश्वामित्र का अयोध्या में आगमन, राक्षसों का वध, मिथिला गमन, माता अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका में सीता-राम मिलन, सीता स्वयंवर, सीत-राम विवाह जैसे प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाइयों और श्रीराम स्तुति को सुरों में सजाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन टीएमयू हॉस्पिटल के निदेशक विपिन जैन और डॉ. सुगंधा जैन ने संयुक्त रूप से किया।
श्रीराम ने चरणों से नहीं बल्कि चरण छूकर किया माता अहिल्या का उद्धार
डॉ. सोनल मान सिंह ने वाल्मीकि रामायण के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि लोगों में भ्रांति है कि पत्थर की मूरत बनीं अहिल्या को भगवान श्रीराम ने मिथिला गमन के दौरान अपनी चरण रज से नारी में परिवर्तित कर दिया। वाल्मीकि रामायण के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने परमतत्व की ज्ञाता माता अहिल्या को ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रणाम किया और उनके चरण छुए। इसके बाद वह श्राप मुक्त हुईं।
सीता स्वयंवर के प्रतिभागी राजाओं से की राजनीतिक पार्टियों की तुलना
डॉ. सोनल मान सिंह ने नाट्य कथा में सीता स्वयंवर का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस की चौपाई सुनाई। कहा कि भूप सहस दस एकहिं बारा। लगे उठावन टरत न टारा। अर्थात धनुभृंग के समय दस हजार राजा एक साथ मिलकर शिव धनुष को उठाने लगे पर वह तनिक भी अपनी जगह से नहीं हिला। डॉ. सोनल ने इसकी तुलना आज के नेताओं से की। इशारों में उन्होंने कह दिया कि आज के समय में सभी पार्टियां एकजुट होकर एक पार्टी को हराने की कोशिश कर रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही।
इनकी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में ब्रीथिंग आर्ट्स के संस्थापक अनुराग चौहान, गुरविंदर सिंह, आरएसएस के विभाग प्रचारक वतन, अनिल अग्रवाल, टीएमयू के रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, टीएमयू की एसोसिएट डीन मंजुला जैन, डीन छात्र कल्याण डॉ. एमपी सिंह, निदेशक सीसीएसआईटी आरके द्विवेदी, पैरामेडिकल के वाइस प्रिंसिपल नवनीत कुमार, कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य अनुराग वर्मा, एसके जैन, डॉ. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, श्रीनाथ के कुलकर्णी, एम जसलीन, डॉ. शिवानी एम कौल आदि की मौजूदगी रही।
टीएमयू में आयोजित कार्यक्रम में नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देती पद्मभूषण सोनाली मान सिंह एंव कला- फोटो : CITY