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उर्वरक विपणन घोटाला : पदाधिकारी ही नहीं कुछ के पते भी मिले फर्जी

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मुरादाबाद। जिले में उद्यान विभाग की निष्क्रिय कई समितियों को उर्वरक बिक्री का लाइसेंस जारी करने के गड़बड़झाले परत दर परत खुलते जा रही हैं। उद्यान विभाग में पंजीकृत कई समितियां ऐसी भी हैं जिनका जो पता उद्यान विभाग में पंजीकृत है वहां वह समितियां हैं ही नहीं। इसका खुलासा उद्यान विभाग की ओर से रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए पत्र से हुआ है। इस चिट्ठी पर डाकिये ने लिखा है कि इस नाम व पते पर कोई नहीं मिला। इस तरह की 14 समितियों को भेजे पत्र डाक विभाग की ओर से वापस किए गए हैं।
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निष्क्रिय समितियों का फर्जी पदाधिकारी बन कर कृषि विभाग से उर्वरक लाइसेंस हथियाने का मामला पहले ही सामने आ चुके हैं। इस तरह की शिकायत के बाद जिला कृषि अधिकारी द्वारा कुछ का लाइसेंस जहां निरस्त किया जा चुका है। वहीं हाल ही में सात उर्वरक बिक्री केंद्रों से उर्वरक बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया जा चुका है। उर्वरक बिक्री के इस खेल की पड़ताल में कुछ और तथ्य भी सामने आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि उद्यान विभाग में पंजीकृत कई ऐसी समितियां हैं जो निबंधन में दर्शाए गए नाम पते पर मौजूद नहीं हैं। ऐसा सिर्फ निष्क्रिय समितियों के मामले में ही नहीं है बल्कि कुछ ऐसी भी समिति हैं जो सक्रिय तो हैं लेकिन उनके पते पर भेजी जाने वाली चिट्ठियां रिसीव न होने के कारण उद्यान विभाग के कार्यालय को वापस आ जा रही हैं। ऐसे ही एक समिति औद्यानिक उत्पादन एवं विपणन सहकारी समिति ग्राम बालापुर है। सूत्र बताते हैं कि यह समिति सक्रिय तो है लेकिन उद्यान विभाग में इसके दर्ज पते पर भेजे पत्र वापस आ गए। उद्यान विभाग की ओर से 25 सितंबर 2019 को जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से रजिस्टर्ड डाक से एक पत्र इस समिति के सचिव को भेजा गया, लेकिन वह 30 सितंबर 2019 को डाक विभाग से संबंधित नाम, पते पर समिति के न होने की टिप्पणी के साथ वापस भेज दिया गया। डाक विभाग ने उद्यान विभाग को इस तरह के 14 रजिस्टर्ड पत्र वापस भेजे हैं।
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