मुरादाबाद। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं होने पर स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं पर अब सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने के दावे के साथ स्मार्ट सिटी ने नाै परियोजनाओं पर करीब 107 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। लेकिन इसमें से कुछ प्रोजेक्ट से उम्मीद के मुुताबिक नतीजे नहीं मिले। यही नहीं निर्माण पूरा होन के बाद भी कुछ परियोजनाएं तो अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में इस पैसों की बर्बादी का जिम्मेदार काैन है… शहरवासियों के जेहन में काैंधने लगे हैं।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जिन परियोजनाओं को तैयार किया गया उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव रहा। कांठ रोड और दिल्ली रोड जैसे कुछ हिस्सों को छोड़ दिया जाए तो अंदरूनी शहर की सड़कों, नालियों और जलनिकासी व्यवस्था की हालत चिंताजनक बनी हुई है। बरसात के मौसम में जलभराव से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है लेकिन इस मूल समस्या के स्थायी समाधान पर कोई अपेक्षित काम नहीं हुआ। कई नेताओं ने सवाल उठाया कि स्मार्ट सिटी के तहत खर्च की गई राशि का वास्तविक उपयोग कहां और कैसे किया गया इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि स्मार्ट सिटी का लाभ पूरे शहर को मिलना चाहिए था लेकिन देहात विधानसभा क्षेत्र, दलित बस्तियों और अंदरूनी शहरी इलाकों को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया। कुछ परियोजनाएं ऐसी बनाई गईं जो आम जनता के सीधे काम नहीं आ रहीं। महंगे दामों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें, सौंदर्यीकरण और पार्किंग जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हस्तशिल्प और निर्यात से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ब्रास फर्नेस सेंटर जैसी योजनाएं जमीनी जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं और वह सफेद हाथी साबित हो रही है। जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की कि स्मार्ट सिटी के तहत कराए गए सभी कार्यों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन-किन ठेकेदारों को काम दिया गया। किस मद में कितना खर्च हुआ और क्या कार्य मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
- क्या बोले जनप्रतिनिधि
- कांठ रोड या दिल्ली रोड ही मुरादाबाद नहीं है। अंदरूनी शहर की सड़कें बदहाल हैं और कोई काम नहीं हो रहा है। स्मार्ट सिटी की योजनाएं कामयाब नहीं हो रही हैं। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए कि इन्होंने क्या काम किया है। पैसों का कहां इस्तेमाल हुआ है इसकी जांच जरूरी है। - रुचि वीरा, सपा सांसद
- इतना पैसा खर्च होने के बाद भी शहर के अंदर कोई खास बदलाव नहीं हो पाया है। सरकारी धन का इस्तेमाल मैं समझता हूं कि ठीक तरीके से नहीं किया गया। जो भी चीजें बन रही हैं उसकी जांच होनी चाहिए कि वह मानकों के अनुरूप हैं भी या नहीं। - डॉ. एसटी हसन, पूर्व महापौर एवं पूर्व सांसद
- स्मार्ट सिटी का लाभ पूरे शहर को मिलना चाहिए था लेकिन सारे कार्य एक ही हिस्से में सिमटकर रह गए हैं। शहर का बड़ा हिस्सा देहात विधानसभा क्षेत्र में आता है लेकिन इन क्षेत्रों में कार्य नहीं कराए गए हैं। - हाजी नासिर कुरैशी, देहात विधायक
- स्मार्ट सिटी के नाम पर बहुत बड़ी लूट हुई है। बिजली, सड़क, नर्सरी और सौंदर्यीकरण का ठेका किसे दिया गया उनका पता नहीं है। ठेकेदारों के नाम सार्वजनिक होने चाहिए। महंगे-महंगे दामों पर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं उनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। - विनोद गुंबर, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
- स्मार्ट सिटी के नाम पर कोई काम नहीं बल्कि सिर्फ दिखावा हुआ है। शहर की सबसे बड़ी समस्या बरसात के दिनों में जलभराव की है। इस समस्या के निस्तारण पर काम होने चाहिए थे लेकिन फिजूलखर्ची की गई है। सड़कों की भी काफी दुर्दशा है। स्मार्ट सिटी के कार्यों की कोई जवाबदेही नहीं है। - जयवीर सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
- स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ लोगों को धोखा दिया जा रहा है। दलित बस्तियों में कोई काम नहीं हुआ है। अधिकारियों की मिलीभगत से सबकुछ तय हो रहा है। ज्यादातर प्रोजेक्ट लोगों के काम नहीं आ रहे हैं। - निर्मल सागर, जिलाध्यक्ष, बसपा
- स्मार्ट सिटी का सपना तब ही पूरा होगा जब सभी को राहत मिलने लगेगी। स्वच्छ पानी, अच्छे पार्क और पार्किंग के नाम पर काफी पैसे स्मार्ट सिटी ने खर्च किए हैं लेकिन मशीनें खराब हो रही हैं और पार्किंग के सामने भी फड़ लग रहे हैं। इन मुद्दों पर अधिकारियों को ज्ञापन भी दूंगा। - वीरेंद्र अरोड़ा, जिलाध्यक्ष, शिवसेना
- स्मार्ट सिटी के जो भी काम शहर में हुए हैं उसकी कोई जवाबदेही नहीं है। किसी भी पार्षद को कोई जानकारी नहीं दी जाती है कि उनके क्षेत्र में स्मार्ट सिटी क्या काम करा रहा है या क्या काम करा चुका है। - अनुभव मेहरोत्रा, नेता विपक्ष, नगर निगम
- अधिकारियों के मनमानी के आगे किसी की चलती नहीं है। स्मार्ट सिटी के तहत ब्रास फर्नेस सेंटर किसी भी काम का नहीं है। इसपर क्या ही किया जा सकता है। यह सफेद हाथी है और पैसे की सीधे तौर पर बर्बादी है। - मो. नोमान मंसूरी, अध्यक्ष, हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसायटी
- निर्यातकों के लिए सिर्फ ब्रास फर्नेंट सेंटर ही बनाया गया है और वह भी किसी काम नहीं आ रहा है। इसके पीछे की वजह यह है कि इसमें कॉमन एरिया दिया गया है जहां पर सभी के प्रोडक्ट एक जैसे ही होने का खतरा है और भट्ठियों को भी कारीगरों के मुफीद नहीं बनाया गया है। - रचित अग्रवाल, अध्यक्ष, मुरादाबाद चैप्टर