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Moradabad News: साठ की उम्र, बीस का हौसला, यशपाल-रामकुमार फिर भरेंगे फर्राटा

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मुरादाबाद। उम्र के जिस पड़ाव पर ज्यादातर लोग आराम और सुकून तलाशते हैं वहीं शहर के दो खिलाड़ी अब भी अपने सपने को पाने के लिए ट्रैक पर संघर्ष कर रहे हैं। चेन्नई में पांच से नौ नवंबर तक होने जा रही 23वीं मास्टर एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शहर के यह दोनों धावक अपने लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद और जुनून के साथ ट्रैक पर उतरेंगे। चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले यह धावक रामकुमार (60) और यशपाल सिंह (65) हैं जिनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए मेडल जीतने का है। चैंपियनशिप में वह मेडल जीतकर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर सकते हैं जहां पहुंचकर वह अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। दोनों खिलाड़ियों ने इस साल जनवरी में वाराणसी में हुए मास्टर्स स्टेट गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था। इसके बाद मार्च में बेंगलुरू में हुई मास्टर्स चैंपियनशिप में भी दोनों खिलाड़ियों ने दोबारा से गोल्ड मेडल जीता और एशियाई चैंपियनशिप में अपनी जगह पक्की की। रेलवे से रिटायर होने वाले दोनों ही एथलीट मौजूदा समय में भी रोजाना नियमित रूप से अभ्यास करते हैं।
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- बेटे के साथ अभ्यास करते हैं यशपाल
आशियाना स्थित आंबेडकर नेचर पार्क के पास रहने वाले यशपाल सिंह ने 65 की उम्र में जो किया है वह किसी युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। रेलवे में खेल कोटे से नौकरी पाने से पहले उन्होंने यूनिवर्सिटी खेलों में शानदार प्रदर्शन किया था। वह तीन बार रूहेलखंड यूनिवर्सिटी गेम्स में चैंपियन बने थे। इंटर यूनिवर्सिटी में चौथा और 1988 में दिल्ली में आयोजित ओपन मास मैराथन में तीसरा स्थान हासिल किया था। रेलवे के लिए उन्होंने अपने कॅरिअर में क्राॅस कंट्री में दूसरा और 3000 की स्टीपल चेज में तीसरा स्थान हासिल किया था। राज्य स्तर पर भी उन्होंने कई बार रैंक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। इस साल मास्टर्स की स्टेट प्रतियोगिता में उन्होंने 2000 मीटर स्टीपल चेज और पांच किमी पैदल चाल में गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल के लिए क्वालीफाई किया और फिर नेशनल में भी दोनों इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर एशियाई ट्रैक का टिकट हासिल किया।
यशपाल के अनुसार वह अब भी खेल से जुड़े हैं और नियमित रूप से केजीके कॉलेज में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देते हैं। रोजाना शाम चार से छह बजे तक वह ट्रैक पर ही अपना समय गुजारते हैं। खुद भी बच्चों के साथ ट्रेनिंग करते हैं। उनका बेटा भी एथलेटिक्स का अभ्यास उन्हीं के साथ करता है। यशपाल का कहना है कि उनका सपना भारत के लिए मेडल जीतने का है। एशियाई खेलों में वह अच्छा प्रदर्शन कर वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह अपने इस सपने को पूरा करना चाहते हैं।
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- रोजाना सात किमी दौड़ लगाते हैं राम कुमार
मानसरोवर कॉलोनी के रहने वाले राम कुमार (63) रेलवे में लोको पायलट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में एनटीपीसी में कार्यरत हैं। रामकुमार एशियाई खेलों में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की पांच किमी पैदल चाल की स्पर्धा में भारत की ओर से उतरेंगे। रामपाल ने भी वाराणसी में स्टेट मास्टर्स और फिर बैंगलुरू नेशनल में गोल्ड मेडल जीतकर इस चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है। रामकुमार भी नियमित रूप से अभ्यास कर अपनी तैयारी कर रहे हैं। रामकुमार के अनुसार वह सप्ताह में दो बार मुरादाबाद आकर स्टेडियम या केजीके कॉलेज में ट्रेनिंग करते हैं जबकि बाकी दिनों में एनटीपीसी परिसर में ही वह सात किमी की दौड़ रोजाना लगाते हैं। उनकी दिनचर्या बिल्कुल तय है और इसी के तहत वह अपना अभ्यास करते हैं। रामकुमार ने कहा कि एशियाई खेलों के लिए उनकी तैयारी चल रही है। उनकी पत्नी और बेटा उनका सबसे बड़ा सहारा हैं। बेटी की शादी हो चुकी है और अब पूरा परिवार उनकी फिटनेस और आने वाले एशियाई मुकाबले को लेकर उत्साहित है। वह इस चैंपियनशिप में मेडल जीतकर वर्ल्ड चैंपियनशिप का टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोंटी का जोर लगाएंगे।
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- ऐसे दुरुस्त रखते हैं फिटनेस
यशपाल सिंह अपनी फिटनेस को बनाए रखने के लिए रोजाना दौड़ लगाकर 500 से 600 कैलरी बर्न करते हैं और आहार में चना, मूंगफली, सोयाबीन, दूध और फल का सेवन करते हैं। रात में हल्का भोजन और पूरी नींद लेते हैं और शाम के समय नियमित ट्रेनिंग और योग भी करते हैं। जबकि राम कुमार भी रोजाना डेढ़ लीटर दूध, बादाम, किशमिश, अखरोट और दो सेब खाकर अपनी फिटनेस को मजबूत रखे हुए हैं। एथलेटिक्स कोच गौरव कश्यप का कहना है कि दोनों धावकों की उम्र भले ही ज्यादा हो लेकिन अपनी फिटनेस के मामले में दोनों युवा खिलाड़ियों को भी मात दे देते हैं।
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