मुरादाबाद। कपड़ों से सेहत और पर्यावरण को नुकसान की बात चौंकाने वाली है। बाजार में मौजूद सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़ों की बड़ी रेंज हम इस्तेमाल करते हैं। पुराने होने पर कचरा की तरह फेंक देते हैं। वास्तविकता है कि यह कपड़ा जलाने पर सिंथेटिक फाइबर नष्ट नहीं होता। प्लास्टिक की भांति 250 साल तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े सेहत के लिए भी नुकसानदायक होते हैं। दिल्ली से आई सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स की एक्सपर्ट कैप्टन मंजू मिनहास ने अपने व्याख्यान में यह तथ्य रखे। सुझाव दिया कि लिनेन, कॉटन के लिए उपयोग करने चाहिए।
पंचायत भवन में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद कानपुर और नगर निगम के तत्वावधान में कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ऑन इंप्लीमेंटेशन ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 पर आयोजित किया गया है। कैप्टन मंजू ने कहा घरों से निकलने वाले कचरा में सबसे मंहगे मानव बाल बिकते हैं। अगर उन्हें सही तरीके से रखा जाए तो 25 रुपये किलो तक कीमत होती है। इसी प्रकार अगर लोहा, प्लास्टिक और गीले कचरा को अलग अलग इकट्ठा किया जाए तो उनकी कीमत होती है। लेकिन उन्हीं को मिला देने से कचरा बन जाता है। चार लोगों की सामान्य परिवार प्रतिदिन दो किलो कचरा उत्पन्न करता है। पेड़ हम लगाते हैं, लेकिन उन्हीं के पत्ते जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। एक साल में भारत में ढाई करोड़ शादियों से हजारों टन कचरा पैदा हो जाता है। आपके द्वारा एक बार उपयोग की गई पॉलिथीन का बैग 250 साल तक पर्यावरण में मौजूद रहता है।
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मेडिकल और इलेक्ट्रानिक वेस्ट पर भी व्याख्यान दिया
एक्सपर्ट अमित सिंह ने मेडिकल बायोवेस्ट मैनेजमेंट रूल्स और शैफाली बक्शी ने इलेक्ट्रानिक वेस्ट मैनेजमेंट के निस्तारण पर व्याख्यान दिया। पहले दिन के सेशन में अंबिकापुर मॉडल का प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद कानपुर के क्षेत्रीय निदेशक रामेश्वर दुबे, मेयर विनोद अग्रवाल, एडीएम प्रशासन लक्ष्मीकांत, सहायक नगर आयुक्त, गंभीर सिंह कार्यकारिणी समिति की उपाध्यक्ष अर्चना ने मंच साझा किया।