मुकदमा दर्ज करने के बजाए रेप पीड़िताओं को थाने से टरकाने और बलात्कार जैसे संगीन गुनाह पर पर्दा डालने के आरोपों में सस्पेंड किया गया दरोगा राजेश कुमार सीओ की जांच में बेगुनाह साबित हुआ है। दरअसल इस जांच का हश्र भी वही हुआ जो पुलिस वालों के खिलाफ बैठाई जाने वाली अमूमन हर जांच का होता है।
रेप पीड़ित बहने सीओ के सामने बयान देते वक्त अपने आरोपों से मुकर गईं। बहनों ने दरोगा को बेकसूर बताया और दरोगा को क्लीन चिट मिल गई। भोजपुर थानाक्षेत्र के पीपलसाना में रहने वाली दो सगी बहनों का एक युवक ने अपहरण कर लिया था। गजरौला ले जाकर एक होटल में उसने दोनों बहनों के साथ बलात्कार किया था।
दोनों बहनें घटना के वक्त स्कूल से घर लौट रही थीं। आरोपी युवक ने रास्ते से ही उनका अपहरण किया था और कार में डालकर गजरौला ले गया था। शाम तक बहनें घर नहीं लौटीं तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने छानबीन की तो दोनों छात्राओं का अपहरण करके गजरौला ले जाने की बात सामने आई।
पुलिस ने सख्ती की तो किसी तरह दोनों बहनें बरामद हु़ईं। इस मामले में हल्का दरोगा राजेश कुमार ने पीड़ित बहनों को रिपोर्ट दर्ज कराने के बजाए खामोशी से घर बैठने की हिदायत दी थी। आरोपी रसूखदार कारखाना मालिक का बेटा था लिहाजा दरोगा ने मामले को दफन करने की हर मुमकिन कोशिश की थी।
पीड़िताओं ने एसपी देहात से मामले की शिकायत की थी। जिसके बाद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले को दफन करने की कोशिश के आरोप में हल्का दरोगा राजेश कुमार को निलंबित कर दिया गया था। एसएसपी ने कटघर सीओ यशवीर सिंह को दरोगा के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे।
सीओ ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। पीड़िता और उनके परिवार के लोगों ने कहा है कि वह जिस दिन थाने पहुंचे थे। उसी दिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट लिख ली गई थी। उन्होंने बताया कि दरोगा की कोई लापरवाही नहीं पाई गई है। जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है।