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इंसाफ की जंग में जिंदगी हार गए शेर सिंह

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मुरादाबाद। मझोला के धीमरी निवासी निवासी 65 वर्ष शेर सिंह इंसाफ की जंग में जिंदगी हार गए। आरोप है कि उनकी जमीन का बैनामा सिविल लाइंस थाने में तैनात एक सिपाही ने अपनी पत्नी के नाम पर करा लिया था। 32 लाख रुपये में बेची गई इस जमीन में से शेर सिंह के हाथ मात्र दस हजार रुपये ही लगे थे। पुलिस ने आरोपी सिपाही के खिलाफ केस तो दर्ज किया, लेकिन कभी उसकी गिरफ्तार नहीं हो सकी। हार थक कर बुजुर्ग अपने ही घर में अनशन पर बैठे थे। शुक्रवार को शेर सिंह ने दम तोड़ दिया। परिवार ने सिपाही के साथ ही पुलिस प्रशासन को भी बुजुर्ग की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
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मझोला थानाक्षेत्र के धीमरी गांव में शेर सिंह का परिवार रहता है। परिवार में पत्नी लीलावती, बेटे जयप्रकाश, अशोक, संजीव और एक बेटी राखी है। लीलावती ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि सिविल लाइंस के हिमगिरी कालोनी निवासी एक सिपाही ने अपनी पत्नी के नाम पर शेर सिंह की पौने तीन बीघा जमीन का बैनामा करा लिया था। महिला का आरोप है कि एग्रीमेंट कराने का बहाना कराकर शेर सिंह को कचहरी बुलाया था। 32 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। लेकिन एडवांस में केवल दो लाख रुपये दिए थे। जिसमें से एक लाख 80 हजार सौदा कराने वाले लोगों ने ले लिए थे। जबकि दस दस हजार रुपये शेर सिंह और उसके भाई की पत्नी को मिले थे। जब शेर सिंह को रकम नहीं मिली और उसकी जमीन का बैनामा भी सिपाही की पत्नी के नाम पर हो गया तो उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अफसरों के दफ्तरों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए थे। शेर सिंह ने इस मामले में 22 जुलाई 2015 को सिविल लाइंस थाने में आरोपी सिपाही, उसकी पत्नी समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है। लीलावती ने बताया कि सिपाही के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। उन्होंने सिपाही की गिरफ्तारी और भूमाफिया घोषित कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। हार थककर शेर सिंह अपने ही घर में 15 दिसंबर को अनशन पर बैठ गए थे। इसकी जानकारी अफसरों तक पहुुंची तो सीओ सिविल लाइंस को जांच सौंपी गई। सीओ अनिल यादव शेर सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने उनसे बातचीत की और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। उन्हें आश्वासन दिया कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का दावा है कि तीन जनवरी को ही अनशन खत्म कर दिया गया है। जबकि परिवार का कहना है कि वह लगातार अनशन पर थे। शुक्रवार को शेर सिंह की तबीयत खराब हुई तो परिजन उन्हें एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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एसएसपी कार्यालय पर शव रखकर प्रदर्शन
मुरादाबाद। परिजन शेर सिंह का शव लेकर एसएसपी कार्यालय पर पहुंच गए और उन्होंने यहां शव रख कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया। परिजनों को यहां भी आश्वासन दिया गया कि आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शेर सिंह ने 2011 में अपनी जमीन का बैनामा सिपाही की पत्नी के नाम कराया था। 2015 में शेर सिंह की ओर से आरोपी सिपाही समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। सिपाही की ओर से भी शेर सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। तीन जनवरी को शेर सिंह ने अनशन खत्म कर दिया था। शुक्रवार को शेर सिंह की मौत हुई तो परिजन शव लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंच गए थे। परिजनों को समझाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
- अमित आनंद, पुलिस अधीक्षक नगर
दस साल में सौ से ज्यादा प्रार्थना पत्र दे चुके थे शेर सिंह
मुरादाबाद। शेर सिंह की पत्नी लीलावती का कहना है कि करीब दस साल में उनके पति ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को सौ से ज्यादा प्रार्थना पत्र दिए थे। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। महिला का कहना है कि जब मेरे पति अनशन पर बैठे थे तो दस से ज्यादा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी थी। लेकिन कहीं से कोई आश्वासन नहीं मिला।
शेर सिंह ने कलक्ट्रेट पर किया था आत्मदाह का प्रयास
मुरादाबाद। धीमरी निवासी शेर सिंह ने अपनी पत्नी लीलावती और बेटी-बेटों के साथ कलक्ट्रेट पर एक बार आत्मदाह की कोशिश की थी। उस वक्त लीलावती और शेर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। दंपती के खिलाफ आत्मदाह का प्रयास करने की धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया था। सिपाही के खिलाफ जब केस दर्ज नहीं हुआ था तो दंपती ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की थी। आरोप लगाया था कि पौने तीन बीघा जमीन सिपाही ने अपनी पत्नी के नाम करा ली है, लेकिन जमीन की कीमत नहीं दी। सिपाही के खिलाफ केस दर्ज न होने पर आठ जुलाई 2014 को मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया गया था।
सिविल लाइंस थाने में इसी सिपाही पर दर्ज हुए सात केस
मुरादाबाद। सिविल लाइंस थाने में आरोपी सिपाही के खिलाफ एक दो नहीं बल्कि सात केस दर्ज हो चुके हैं। सभी केस अलग-अलग लोगों ने दर्ज कराए हैं। 2010 में राम प्रसाद, 2012 में ब्रहानंद पाठक ने सिपाही, उसकी पत्नी और अन्यों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। इन दोनों केसों को पुलिस खत्म कर चुकी है। 2013 में धर्मपाल सिंह नाम के व्यक्ति ने भी केस दर्ज कराया था। 2015 में शेर सिंह की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज किया गया था। 2016 में शौकीन नाम के व्यक्ति और 2018 में जफर नाम के व्यक्ति ने सिपाही के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
कई बार निलंबित हो चुका है आरोपी सिपाही
मुरादाबाद। मुरादाबाद, बिजनौर और तैनाती के दौरान आरोपी सिपाही कई बार निलंबित हो चुका है। मुरादाबाद नियुक्ति के दौरान सिपाही आठ माह तक लगातार गैर हाजिर रहा था।
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