रामपुर जेल में बंद शबनम के लिए 23 फरवरी का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा। अमरोहा जिला जज की अदालत में उसके केस की रिपोर्ट डीजीसी द्वारा सौंपी जाएगी। यदि इस रिपोर्ट में कोई भी लंबित याचिका या प्रार्थनापत्र पाया गया तो शबनम का डेथ वारंट टल सकता है। यदि इस रिपोर्ट में कोई दया याचिका न पाई गई तो शबनम का डेथ वारंट जारी हो जाएगा। शबनम के परिजन और अधिवक्ताओं की नजर इस रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
14 अप्रैल 2008 को अपने ही सात परिजनों की हत्या में अपने प्रेमी के साथ अभियुक्त बनी शबनम व उसके प्रेमी सलीम को 16 अगस्त 2010 को जिला जज अमरोहा सैयद आमिर अब्बास हुसैनी ने फांसी की सजा सुनाई। इसके बाद दोनों के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक फांसी की सजा को चुनौती दी परंतु उन्हें सफलता नहीं मिली।
यहां तक कि राष्ट्रपति द्वारा भी दया याचिका अस्वीकार कर दी गई। इसके बाद विगत दिनों जिला जज अमरोहा ने डीजीसी महावीर सिंह से 23 फरवरी तक इस प्रकार की रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट में जिला जज द्वारा शबनम के केस से संबंधित किसी भी लंबित याचिका या प्रार्थनापत्र की जानकारी मांगी गई है।
डीजीसी महावीर सिंह ने बताया कि वह 23 फरवरी को जिला जज को शबनम केस की रिपोर्ट सौंपेगे। वहीं शबनम के वकील अरशद अंसारी ने बताया कि 23 फरवरी बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। हम जिला जज द्वारा की जाने वाली अग्रिम कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।