प्रेमिका से बलात्कार के मामले में अदालत ने प्रेमी को दोषी करार देते हुए उसे सात साल कैद और बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। हालांकि पीड़िता ने कोर्ट में दिए बयान में कहा था कि उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ था, वह अपनी मर्जी से प्रेमी के साथ गई थी और संबंध बनाए थे।
लेकिन पीड़िता नाबालिग थी लिहाजा उसके बयानों पर गौर नहीं किया गया। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। मामला संभल जिले में नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला नखासा का है। एक व्यक्ति ने मोहल्ले के ही मिथुन के खिलाफ पांच साल पहले नखासा थाने में अपनी नाबालिग बेटे के अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके पीड़िता को बरामद कर लिया था। पीड़िता को कोर्ट में पेश किया गया था तो उसने आरोपी के पक्ष में बयान दिए थे। लेकिन जब उसका मेडिकल कराया गया तो वह नाबालिग निकली। लिहाजा कानूनन उसके बयानों को नहीं माना गया।
मामले की सुनवाई एफटीसी फर्स्ट मनोज कुमार अग्रवाल की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष एडीजीसी जावेद कमर खां ने रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्त मिथुन को दोषी माना और उसे सात साल कैद और बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया।