होटल में खाना खाने के बाद सर्विस चार्ज चुकाना आपकी मजबूरी नहीं है। यह आपकी इच्छा पर डिपेंट करता है कि आप सर्विस चार्ज दें या नहीं दें। लेकिन होटल - रेस्टोरेंट संचालक सर्विस चार्ज को बिल में जोड़कर ग्राहकों से उसकी वसूली कर रहे हैं।
शहर के कई होटलों में दस फीसदी सर्विस चार्ज वसूला जा रहा है तो कुछ होटल बीस फीसदी तक सर्विस चार्ज वसूल रहे हैं। नियमों की बात करें तो होटल - रेस्टोरेंट में आपसे खाने के बिल में होटल मालिक बस 14.5 प्रतिशत वैट और 5.5 प्रतिशत सर्विस टैक्स वसूल सकते हैं।
लेकिन होटल - रेस्टोरेंट संचालक सर्विस चार्ज के नाम से ग्राहकों की जेब पर एक और कैंची चला रहे हैं। कुछ होटल 10 प्रतिशत तो कुछ होटल 20 प्रतिशत तक सर्विस चार्ज वसूल रहे हैं। यानी यदि आपका होटल का बिल 1000 रुपये है तो पहले उस पर होटल वाले वैट और सर्विस टैक्स लगाकर उसे 1200 रुपये कर देते हैं।
फिर इस बारह सौ रुपये पर दस प्रतिशत सर्विस टैक्स लगाकर उसे 1320 रुपये तक पहुंचा देते हैं। कुछ होटलों में बीस फीसदी सर्विस चार्ज लगाकर ग्राहकों से 1000 रुपये के खाने के 1440 रुपये वसूले जा रहे हैं।
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद अब होटल मालिकों को अपने यहां बोर्ड लगाना होगा, जिसमें साफ - साफ लिखना होगा कि यदि ग्राहक चाहे तो सर्विस चार्ज दे और यदि सर्विस से खुश न हो तो सर्विस चार्ज न दे। केंद्र के इस फैसले पर होटल वालों में मिलीजुली प्रतिक्रिया है।