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मार्च में 27 हजार तो जून में मात्र 10 हजार लीटर बिका हैंड सैनिटाइजर

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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए आईसीएमआर ने हाथों को वायरस मुक्त रखने की सलाह दी है। इसके साथ ही चेहरे को भी सुरक्षित रखने को कहा है। मार्च में भारत में संक्रमण की शुरूआत थी। अब जून खत्म हो चुका है और ये खतरा भारत में विकराल रूप ले चुका है। लेकिन संक्रमण बढ़ने के साथ लोगों में सतर्कता कुछ घटी है। आंकड़ों की बात करें तो मार्च में जो सैनिटाइजर 27 हजार लीटर बिका था। जून में मुरादाबाद में उसकी खपत घटकर 10 हजार लीटर पहुंच गई।
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मुरादाबाद मंडल में 15 कंपनियां हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन कर रही हैं। इनमें सात बड़ी इकाइयां हैं और इनका हैंड सैनिटाइजर देशभर में सप्लाई हो रहा है। सर्वाधिक आठ यूनिट बिजनौर में, अमरोहा और संभल में दो-दो यूनिट और रामपुर में तीन इकाइयां हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईसीएमआर से जारी गाइड लाइन में हाथों को साफ रखने को कोरोना से लड़ाई का मुख्य हथियार बताया गया है। इसके लिए साबुन सबसे कारगर विकल्प है। लेकिन कामकाजी लोगों और सार्वजनिक स्थलों पर हाथों को साफ करने के लिए सैनिटाइजर एकमात्र विकल्प है। यह आसानी से उपलब्ध हो और इसकी कालाबाजारी न हो इसके लिए सरकार ने इसे आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल कर इनके दाम भी निर्धारित कर दिए। लाइसेंस की बाध्यता भी खत्म की गई जिससे इसे मेडिकल स्टोर से लेकर पान की दुकान तक कहीं भी बेचा जा सके। लेकिन संक्रमण बढ़ने के साथ सैनिटाइजर की बिक्री घटना शुरू हो गई।
औषधि विभाग के आंकड़े इसके गवाह हैं। मार्च से कोरोना की दहशत बनी। रातों-रात मेडिकल स्टोरों से हैंड सैनिटाइजर गायब हो गए। लोगों ने कालाबाजारी तक की। मार्च महीने में मुरादाबाद जिले में 27000 लीटर हैंड सैनिटाइजर की खपत हुई। अप्रैल में खपत बढ़कर 30 हजार लीटर पहुंच गई। मई में घटकर 25 हजार लीटर और जून में मात्र 10 हजार लीटर हैंड सैनिटाइजर की बिक्री हुई है। जबकि जिले की आबादी करीब 47 लाख से अधिक है। आंकड़ों के हिसाब से तो ऐसा लगता है कि अधिकतर लोगों के घर के बजट में हैंड सैनिटाइजर जगह नहीं बना पाया है।
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हॉटस्पॉट इलाके बढ़ने के साथ हैंड सैनिटाइजर महंगा
मुरादाबाद। सरकार ने 80 फीसदी एल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर पांच सौ रुपये प्रति लीटर निर्धारित की है। शुरुआती दिनों में बाजार में हैंड सैनिटाइजर की खपत बढ़ने से कई कंपनियों ने इसका उत्पादन शुरू कर दिया। इससे हैंड सैनिटाइजर की कीमतें सरकार से निर्धारित रेट के मुकाबले बढ़कर 150 रुपये लीटर तक आ गया। पांच लीटर की केन साढ़े सात सौ रुपये में बिकने लगी। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के हैंड सैनिटाइजर की पांच लीटर की केन पर एमआरपी 1500 से 1900 रुपये दर्ज है। संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ मुरादाबाद में 53 इलाके हॉटस्पॉट बन चुके हैं। शहर में मेडिकल की थोक और रिटेल की 900 दुकानें हैं। हॉटस्पॉट क्षेत्रों में करीब तीन सौ दुकानें हैं। हॉटस्पॉट इलाकों के बाजारों के साथ मेडिकल की थोक और रिटेल दुकानें भी बंद हैं। इससे हॉटस्पॉट से बाहर के मेडिकल स्टोर संचालकों ने हैंड सैनिटाइजर का रेट बढ़ा दिया है। साढ़े सात सौ रुपये में बिकने वाली पांच लीटर की केन एक हजार से 1200 रुपये में बिक रही है। गुरहट्टी चौराहा स्थित मेडिकल स्टोर संचालक पुष्पांक के मुताबिक हैंड सैनिटाइजर 50 एमएल 50 रुपये का है। एक लीटर 250 रुपये और पांच लीटर एक हजार से 1200 रुपये का बिक रहा है। सिविल लाइंस निवासी ग्राहक विकास रस्तोगी ने बताया कि महीने भर पहले 180 रुपये लीटर हैंड सैनिटाइजर खरीदा था।
- हैंड सैनिटाइजर के प्रति लोग गंभीर नहीं हैं। लोगों को हैंड सैनिटाइजर का अतिरिक्त खर्चा लग रहा है, जबकि वही लोग रोजाना सैकड़ों रुपये बीड़ी, सिगरेट और पान तंबाकू में उड़ा देते हैं। शुरुआती महीनों की तुलना में हैंड सैनिटाइजर की खपत तीन गुना कम हुई है।
- नरेश मोहन दीपक, जिला औषधि निरीक्षक
24 घंटे में सात लोगों की मौत और 26 नए पॉजिटिव
संक्रमण के साथ बढ़ रही लोगों की लापरवाही, कोई नहीं अपना रहा समझदारी
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। पीतल नगरी में संक्रमण की रफ्तार दोगुनी हो गई है। इससे मृत्युदर भी बढ़ गई है। संक्रमण बढ़ने के साथ लोगों की लापरवाही भी बढ़ने लगी है। बीते 24 घंटे में सात लोगों की मौत और 26 नए संक्रमित आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। लेकिन, लोगों पर इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए समझदारी अपनाने के बजाए लोग बाजारों में लापरवाही बरत रहे हैं। राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं।
सीएमओ डा. एमसी गर्ग बताते हैं, अनलॉक-1 के बाद से संक्रमण में तेजी आई है। पहले पॉजिटिव केस केवल संक्रमित परिवार के सदस्यों और फर्स्ट एवं सेकेंड कांटेक्ट से आए लोग ही आ रहे थे। लेकिन अब अधिकतर नए केस हैं। इनकी न कोई ट्रैवल हिस्टी है और न ही पॉजिटिव व्यक्ति से संपर्क रहा है। कई चौंकाने वाले केस भी हैं। ऐसी कई गृहणियां संक्रमित आई हैं, जिन्होंने संक्रमणकाल के बाद से घरों से बाहर कदम नहीं रखा है। ऐसे में अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। लेकिन, अधिकतर लोग ठीक इसका उल्टा कर रहे हैं। मास्क नहीं पहन रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। इसके नतीजे बेहद घातक हो सकते हैं। सीएमओ का कहना है कि लोगों को अपनी और परिवार की फिक्र खुद ही करनी होगी। तभी संक्रमण को फैलने से बचाया जा सकता है।
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