क्रांति ने उन्हें पहचान लिया। करीब चार-पांच मिनट बाद एक और गोली चलने की आवाज आई। परिजनों ने मौके पर जाकर देखा तो घेर से करीब 60 मीटर दूर सो रहे प्रताप के भतीजे उमेश को भी गोली मार दी गई थी। दोनों को एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने प्रताप को मृत घोषित कर दिया।
गंभीर हालत में उमेश को अलीगढ़ रेफर किया गया, जहां अगले दिन सुबह उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने क्रांति की तहरीर के आधार पर नौ आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने साक्ष्यों के आधार पर पक्ष रखा। न्यायालय ने जयनारायण, विजयपाल और कालीचरन उर्फ काली को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 1.10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, जयपाल को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रेम विवाह को लेकर थी रंजिश
हत्याकांड के पीछे प्रेम विवाह को लेकर पुरानी रंजिश सामने आई थी। घटना से करीब ढाई वर्ष पहले प्रताप का बेटा नेकपाल गांव के ही हरिओम की बहन को लेकर चला गया था। बाद में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली थी। इसके बाद से हरिओम के परिवार की प्रताप के परिवार से रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में चाचा-भतीजे की हत्या किए जाने की बात सामने आई थी।