संभल की जामा मस्जिद के नजदीक बन रही सत्यव्रत पुलिस चौकी की जमीन को वक्फ संपत्ति बताने वाले मुतवल्ली मोहम्मद खालिद अपने पूर्व के बयान से पलट गए हैं। उन्होंने एसपी को शपथपत्र देकर कहा है कि जिस जमीन पर पुलिस चौकी का निर्माण किया जा रहा है वह सरकारी है।
उनका उस जमीन से कोई लेनादेना नहीं है।शपथपत्र में उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद के नजदीक जो सत्यव्रत पुलिस का निर्माण किया जा रहा है वह जमीन सरकारी है। उनके बुजुर्ग इस जमीन की देखभाल करते थे।
उसी आधार पर वह भी देखभाल करने लगे, लेकिन अब जानकारी मिली है कि यह पालिका की जमीन है। मालूम हो कि मुतवल्ली ने प्रशासन को वक्फनामा दिया था, जिसे प्रशासन ने फर्जी माना था। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है।
प्रशासन को दिया था 1929 में बना वक्फनामा
जामा मस्जिद के पास बन रही पुलिस चौकी की जमीन को लेकर प्रशासन को जो वक्फनामा दिया गया था वह 1929 का है। यह वक्फ मुतव्वली मोहम्मद खालिद के दादा अब्दुल समद के नाम पर बना है। वक्फनामे में 20 संपत्तियां दर्ज हैं। उसी में पुलिस चौकी की जमीन भी दर्शाई गई है, जिसकी चौहद्दी गलत लिखी थी। जिसके आधार पर प्रशासन ने वक्फनामे को फर्जी माना था।
वक्फ बोर्ड में संपत्तियों की जांच कराई जाएगी-एसपी
जो संपत्तियां प्रशासन को दिए गए वक्फनामें में दर्ज हैं उनकी जांच पुलिस वक्फ बोर्ड में भी कराएगी। वक्फ संपत्ति 39 ए के रूप में दर्ज दिखाई गई हैं। इसमें कुल 20 संपत्तियां अंकित हैं। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई, का कहना है कि भौतिक सत्यापन इन सभी संपत्तियों का कराया जाएगा। इसके अलावा वक्फ बोर्ड में भी 39 ए पर दर्ज संपत्तियों की भी जांच कराई जाएगी। जिसके आधार पर कार्रवाई की जानी है।
मुतवल्ली की ओर से शपथपत्र दिया गया है, जिसमें कहा गया कि सत्यव्रत पुलिस चौकी की जमीन से उनका कोई लेनादेना नहीं है।अज्ञात के खिलाफ वक्फ संपत्तियों के खुर्द बुर्द करने में जो रिपोर्ट दर्ज है उसकी जांच चल रही है।-एसपी, संभल
वक्फनामा की जांच तीन सदस्यीय समिति से कराई थी। जिसमें वह वक्फनामा अवैध पाया गया था। उसके आधार पर ही अज्ञात के खिलाफ ईओ पालिका ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसमें जांच पुलिस भी कर रही है। वक्फनामा में जो संपत्तियां दर्ज हैं उन सभी की जांच कराई जा रही है।-डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल