दोनों भाइयों पर सात करोड़ का जुर्माना
मस्जिद भी इसी परिसर में बनी है। वहीं, दूसरी ओर तहसीलदार धीरेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी कोर्ट में मामला विचाराधीन था। जिसमें शनिवार को बहस पूरी हो चुकी है। अब बेदखली का आदेश किया गया है। साथ ही दोनों भाइयों पर सात करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।
तहसीलदार ने बताया गया है कि गाटा संख्या 452 की करीब दो बीघा ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर मस्जिद, मजार और मकान का निर्माण किया गया है। 1972 में तत्कालीन तहसीलदार ने इस जमीन के पट्टे निरस्त कर ग्राम समाज की जमीन घोषित किया था।
लेखपाल की रिपोर्ट पर धारा 67 के तहत कार्रवाई
इसके बाद भी इस जमीन पर कब्जा कर लिया गया। हल्का लेखपाल की रिपोर्ट पर धारा 67 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी है। मालूम हो 2016 और 2017 में सरकारी जमीन होने का दावा करते हुए शिकायत की गई थी।
बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। लेकिन आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, दूसरी ओर एक शिकायत तहसीलदार न्यायालय में भी दर्ज कराई गई थी। उसमें ही सुनवाई के दौरान अब कब्जा मुक्त किए जाने का आदेश किया गया है।
यह इबादतगाह है और हम इसकी देखभाल करते हैं। यह तर्क मौलाना आफताब हुसैन वारसी की ओर से तहसीलदार न्यायालय में दाखिल किया गया था। तहसीलदार का कहना है कि निर्माण 20 वर्ष पहले किया गया था। 1972 में इस जमीन को ग्राम समाज की घोषित कर दिया गया था।
1972 में तत्कालीन तहसीलदार संभल ने पट्टे निरस्त कर ग्राम समाज की भूमि घोषित किया था। इसके बाद भी दो लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। अब न्यायालय से बेदखली का आदेश किया है। अब कब्जा हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी। कब्जाधारकों को खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
-धीरेंद्र सिंह, तहसीलदार, संभल