राजभर ने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित समाज के नेताओं को उचित सम्मान नहीं देता। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले समय में समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। राजभर के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद रुचिवीरा ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मजबूती से खड़े हैं। समाजवादी पार्टी को तृणमूल कांग्रेस समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश की जनता आने वाले समय में ऐसे बयानों का जवाब देगी। रुचिवीरा ने पलटवार करते हुए दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि स्वयं ओम प्रकाश राजभर और भाजपा के कई सांसद समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा कि वह राजभर के बयानों को कोई महत्व नहीं देतीं और समाजवादी पार्टी के संगठन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का जवाब जनता चुनाव में देगी। मुरादाबाद के पीडीए सम्मेलन से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।