संत पागल बाबा राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के साथ-साथ विश्व शांति, जगत कल्याण व गौ रक्षा के लिए तपस्या कर रहे थे। बाबा के सेवक ने बताया कि अनुमति लेने पर सभी नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी।
कैलादेवी थाना क्षेत्र के गांव बैनीपुर चक के नजदीक एक ग्रामीण के खेत में पंचाग्नि तपस्या कर रहे अमेठी के शिवधाम निकट सगरा महाकाल के बाबा पागलदास काली कमली वाले (72) की रविवार की सुबह करीब 11 बजे मौत हो गई। वह पांच दिवसीय तपस्या कर रहे थे। चौथे दिन उनकी मौत हुई है। जिला अस्पताल पहुंचने पर बाबा के सेवक भारत सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही रही है। तपस्या शुरू होने के बाद से एक भी दिन स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया। रविवार को अचानक हालत बिगड़ी और मौत हो गई।
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संत पागल बाबा ने प्रशासन से पांच दिवसीय तपस्या के लिए अनुमति ली थी। 23 मई से 27 मई तक की अनुमति मिली थी। पंचाग्नि तपस्वी ने भीषण गर्मी में अपने चारों दिशाओं में प्रचंड अग्नि प्रज्वलित कर ली थी और वह बीच में बैठकर तपस्या कर रहे थे। यह तपस्या वह राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के साथ-साथ विश्व शांति, जगत कल्याण व गौ रक्षा के लिए कर रहे थे। बाबा के सेवक ने बताया कि अनुमति लेने पर सभी नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी लेकिन प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। रविवार को जब बाबा की हालत बिगड़ी तो तत्काल एंबुलेंस भी नहीं मिली। करीब आधा घंटे बाद एंबुलेंस मिल सकी। इसके बाद जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां मृत होने की पुष्टि की। वहीं दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन की ओर से बाबा के परिजनों को सूचना दे दी गई है। वह अमेठी से संभल के लिए रवाना हो गए हैं। परिजनों के आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया है।