मुरादाबाद। अब औषधीय पौधे सहजन के गुणों के सहारे बच्चों का कुपोषण दूर किया जाएगा। बच्चों, महिलाओं व किशोरियों को एनीमिया और कुपोषण से बचाने के लिए जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित करीब दो हजार आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन हजार सहजन के पौधे रोपित किए जा चुके हैं। जिले में वर्तमान में करीब 37 हजार 440 कुपोषित बच्चे हैं। सहजन के पौधे की फलियों को स्कूलों के मिड डे मील व आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले पोषाहार में इस्तेमाल किया जाएगा।
मुरादाबाद जिले में कुपोषण मिटाने के लिए शासन स्तर से कई योजना संचालित हैं। बच्चों को पोषाहार वितरण से लेकर नियमित स्वास्थ्य की जांच, टीकाकरण व नियमित देखभाल की जाती हैं। इसके बावजूद सात माह से लेकर छह साल तक के करीब 17 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में है। काफी योजनाओं व प्रयासों के बावजूद जुलाई माह की रिपोर्ट के अनुसार 32 हजार 504 बच्चे कुपोषित व चार हजार 936 बच्चे अति कुपोषित मिले हैं। अब इसमें सुधार के लिए बाल विकास विभाग सहजन के पौधे का सहारा लेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब तीन हजार पौधे रोपित किए गए हैं। सहजन के पौधे की पत्तियों व फलियों का इस्तेमाल आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में बनने वाले मिड डे मील में किया जाएगा। महिलाओं को जागरूक किया, ताकि वे इसका सही तरीके से इस्तेमाल कर सके।
सहजन के पौधे के गुण:
सहजन का पेड़ औषधिय पौधा होता है। इसकी सब्जी और अचार बनता है। इसकी फली में प्रोटीन अधिक होता है। इसके अलावा विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक काफी मात्रा में होता है। यह बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। कैंसर, जोड़ों के दर्द, डिप्रेशन, स्कीन समस्या, पेट की बीमारियों जैसे लीवर आदि के लिए लाभकारी है।
बीमार बच्चों के घर भी रोपित कराए जांएगे पौधे
विभागीय अधिकारियों की मानें, तो विभाग महिलाओं को सहजन के गुणों के प्रति जागरूक करेगा। ताकि नियमित भोजन में भी उसका इस्तेमाल कर सके। बच्चे कुपोषित हैं, जल्द ही उनकी माताओं को जागरूक कर उनके घरों पर सहजन का पौधा रोपित कराया जाएगा।
जिले में है 2742 आंगनबाड़ी केंद्र
मुरादाबाद जिले में 2742 आंगनबाड़ी केंद्र है, इनमें से 2092 ग्रामीण क्षेत्र में व 650 केंद्र शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। शहरी क्षेत्रों में स्थित आंगनबाड़ी केंद्राें पर जगह की कमी के चलते सहजन के पौधे रोपित नहीं किए गए हैं।
गांव देहात के आंगनबाड़ी केंद्रों पर सहजन के पौधे रोपित कराए जा चुके हैं। महिलाओं को उनके गुणों के प्रति जागरूक किया जाएगा। ताकि वे इसका पूरा लाभ ले सके। सहजन का पौधा औषधिय पौधा है।
अनुपमा शांडिल्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी।