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Moradabad News: वार्ड-69 आजादनगर में रूबी परवीन का निर्वाचन निरस्त, अर्शी बनीं पार्षद

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मुरादाबाद। नगर निगम चुनाव से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए वार्ड-69 से निर्वाचित घोषित हुई रूबी परवीन का निर्वाचन निरस्त कर दिया है। अपर जनपद न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने यह आदेश पारित किया है। अदालत ने याचिनी अर्शी की दलील को स्वीकार करते हुए उन्हें द्वितीय स्थान पर रहने के आधार पर निर्वाचित घोषित कर दिया है।वार्ड-69 आजादनगर सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी महिला) के लिए आरक्षित थी। चार मई 2023 को हुए मतदान में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रूबी परवीन को 1827 वोट मिले थे जबकि सपा समर्थित प्रत्याशी अर्शी को 1114 वोट मिले थे। अन्य प्रत्याशियों में चांदनी को 937, साबिस्ता परवीन को 323, रिजवाना को 288 और शकीला बेगम को 274 वोट प्राप्त हुए थे। मतगणना के बाद रूबी परवीन को विजयी घोषित किया गया था।
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इसके बाद सपा समर्थित प्रत्याशी अर्शी ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि रूबी परवीन वार्ड-69 की मतदाता ही नहीं हैं। उन्होंने नामांकन के दौरान फर्जीवाड़ा किया और किसी अन्य के वोट का सहारा लेकर चुनाव लड़ा। अर्शी का आरोप था कि रूबी परवीन का नाम मतदाता सूची में वार्ड-65 के अंतर्गत आता है और इस तरह वह वार्ड-69 से चुनाव लड़ने की अर्हता ही नहीं रखतीं हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों का परीक्षण किया। नामावली, मतदाता सूची और शपथ पत्रों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि रूबी परवीन का नाम वार्ड-69 की मतदाता सूची में वैध रूप से दर्ज नहीं है। अदालत ने कहा कि नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-24 के अनुसार केवल वही व्यक्ति पार्षद बन सकता है जो संबंधित नगर का निर्वाचक हो। चूंकि रूबी परवीन इस कसौटी पर खरी नहीं उतरीं इसलिए उनका निर्वाचन निरस्त किया जाता है।
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अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव के समय यदि कोई प्रत्याशी अर्हता नहीं रखता तो उसका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाएगा। इसलिए रूबी परवीन का निर्वाचन निरस्त कर दिया गया और द्वितीय स्थान पर रहने वाली अर्शी को पार्षद घोषित कर दिया गया।

वर्जन
- यह न्याय की जीत है। मैंने शुरू से ही कहा था कि निर्वाचन में धांधली हुई है। अदालत ने मेरी बात को सही ठहराया। मैं न्यायालय का आभार प्रकट करती हूं। अब मेरा प्रयास होगा कि वार्ड-69 के विकास कार्यों को गति दी जाए ताकि मैं जनता की उम्मीदों पर खरी उतरूं। - अर्शी
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- न्यायालय को गलत दस्तावेज दिखाकर गुमराह किया गया है। हम कोर्ट में अपना पक्ष ही नहीं रख पाए हैं। अगर मेरा वोटर लिस्ट में नाम नहीं होता तो मैं नामांकन ही नहीं कर सकती थी। नामांकन की जांच भी की जाती है जिसमें सही पाए जाने पर ही प्रत्याशी चुनाव लड़ पाता है वरना नामांकन ही खारिज हो जाता है। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि हमारा पक्ष सुना जाएगा और हमें न्याय मिलेगा। जिन लोगों ने यह षडयंत्र रचकर कोर्ट को गुमराह किया है उनके खिलाफ हम मानहानि का दावा करेंगे। इस आदेश के खिलाफ हम इलाहाबाद हाइकोर्ट का रुख करेंगे। - रूबी परवीन
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