मुरादाबाद। ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और कौशल विकास के जरिये आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही आरसेटी योजना अब कागजों तक सिमटती दिखाई दे रही है। कांठ रोड स्थित आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) में कुल 52 तरह के प्रशिक्षण कोर्स संचालित किए जाने हैं लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से 45 कोर्स ऐसे हैं, जिनमें एक भी युवा प्रशिक्षण लेने नहीं पहुंच रहा। फिलहाल पिछले तीन महीने में सिर्फ सात कोर्स में ही प्रशिक्षण दिया गया।
आरसेटी मुरादाबाद को हर तीन महीने में 250 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन पिछले तीन महीनों में संस्थान सिर्फ 180 युवाओं को ही प्रशिक्षण दे पाया। ऐसे में पूरे साल में 1000 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिख रहा है। संस्थान में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबिंग, डेयरी, मशरूम उत्पादन, अगरबत्ती निर्माण, फूड प्रोसेसिंग समेत स्वरोजगार आधारित 52 ट्रेड मौजूद हैं। इनमें से 45 कोर्स में युवाओं की रुचि नहीं दिख रही है।
इन कोर्सों में ज्यादा प्रशिक्षण ले रहीं महिलाएं
सिलाई, ब्यूटी पार्लर मैनेजमेंट, मोमबत्ती बनाने के कोर्स में सबसे ज्यादा महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं। इन कोर्सों में 10 से 30 दिन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वर्तमान में सिलाई में 35 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं। जुलाई में दो और कोर्स में प्रशिक्षण देने के लिए पंजीकरण चल रहा है।
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प्रशिक्षण के लिए पात्रता और सुविधाएं
ग्रामीण युवक व युवती जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के बीच है। निशुल्क प्रशिक्षण के साथ भोजन की व्यवस्था है। आधार कार्ड, वोटर आईडी, चार पासपोर्ट साइज के फोटो, बीपीएल कार्ड समेत अन्य दस्तावेज होना भी जरूरी है। आरसेटी के अधिकारियों का कहना है कि बीपीएल कार्ड धारकों को प्राथमिकता दी जाती है। बाकी के भी युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिन कोर्सों में युवा मिलते हैं, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इस वक्त दो कोर्स में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। करीब 53 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं।
-रजनीश कुमार गौतम, डायरेक्टर, आरसेटी मुरादाबाद