मुरादाबाद। जिले में खनन सिंडिकेट की जड़े गहरी हैं। जिसे हिलाने की कोशिश में जनपद में तैनात रहे एसपी, तीन दरोगा और दो इंस्पेक्टरों को ट्रांसफर की ‘सौगात’ मिल चुकी है, लेकिन खनन का खेल जारी रहा।
मुरादाबाद में 2016 में एसपी देहात के पद पर तैनात रहीं आईपीएस सुजाता सिंह ने कांठ, डिलारी, ठाकुरद्वारा और भगतपुर में खनन पर कार्रवाई की थी। उत्तराखंड से आने वाले डंपरों पर कार्रवाई के लिए उन्होंने थाना प्रभारी और चौकी इंचार्जों को निर्देश दिए थे। बावजूद इसके डंपर का संचालन बंद नहीं हुआ था। तब वह खुद ही ठाकुरद्वारा क्षेत्र में जाकर कार्रवाई करती थीं। चर्चा है कि इससे बौखलाकर खनन माफिया ने अपनी पहुंच के बल पर उनका ट्रांसफर करा दिया था।
13 सितंबर को खनन माफिया ने लोगों को उकसाकर एसडीएम और खनन अधिकारी पर हमला करा कर डंपर छुड़ा लिए थे। इस घटना से कुछ दिन पहले भी जनपद की पुलिस में अचानक एक सीओ, दो इंस्पेक्टर और तीन दरोगा के ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों का दावा है इन ट्रांसफर के पीछे भी खनन का खेल था। बताया जा रहा है कि ट्रांसफर के पीछे खनन का ही मामला था। तब एक दरोगा की ऑडियो बरेली जोन के एक बड़े अधिकारी के पास पहुंची थी। जिसमें दरोगा एक व्यक्ति को जनपद के एक अधिकारी के नाम पर धमकाकर खनन माफिया उगाही की बात कर रहा था। इसके बाद ही दरोगा, इंस्पेक्टर और सीओ का ट्रांसफर किया गया था। हालांकि ऑडियो वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचाने में भी एक अन्य दरोगा का नाम सामने आया था। जिससे गुस्साए अफसरों ने उसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी थी। इसके बाद शिकायत करने वाले दरोगा को भी जिले से बाहर कर दिया गया। इनके ट्रांसफर के पीछे भी जनहित ही बताया गया। पहले एसडीएम और फिर पुलिस टीम पर हमला करने वाला पचास हजार का इनामी जफर अब तक फरार है लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाई है।