पूरे देश में पीएम मोदी के ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ मिशन का शोर मचा है लेकिन शहर की एक बेटी को पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है। आटो चालक पिता को पांच बच्चों का पेट पालना ही टेढ़ी खीर है, लिहाजा पिता ने बेटी को पढ़ाई छोड़ने का फरमान सुना दिया।
बेटी पढ़ने की जिद पर अड़ी तो पिता ने डांट दिया। इससे आहत छात्रा ने जहर खा लिया। फिलहाल यह छात्रा जिला अस्पताल में मौत से जंग लड़ रही है। नागफनी के मोहल्ला बंगला गांव निवासी आटो चालक नरोत्तम सिंह के पांच बच्चे हैं। आटो की कमाई में नरोत्तम बमुश्किल पत्नी और पांच बच्चों का पेट पाल पाता है।
नरोत्तम की बेटी शीतल दयानंद डिग्री कालेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है। आमदनी कम होने की वजह से नरोत्तम ने बेटी शीतल से कहा कि अब वह पढ़ाई बंद कर दे। लेकिन शीतल पढ़ाई जारी रखना चाहती थी। लिहाजा वह पढ़ने की जिद पर अड़ गई।
सोमवार रात शीतल ने पिता से पढ़ाई जारी रखने की जिद तो उसने बेटी को डांट दिया। जिससे आहत शीतल ने रात में घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया। छात्रा के मुंह से झाग निकलता देख परिजनों के होश उड़ गए। परिजन तुरंत छात्रा को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
डाक्टरों ने तुरंत उसका इलाज शुरू किया। फिलहाल शीतल जिला अस्पताल में भर्ती है। होश में आने पर उसने कहा कि वह पढ़ाई जारी रखना चाहती है। पढ़कर कुछ बनना चाहती है। एक तरफ बेटियाें को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ जैसे अभियान चला रखे हैं दूसरी ओर शहर में एक बेटी पढ़ाई जारी रखने के लिए जहर खाने को मजबूर है।
पिता की सीमित आय होने की वजह से उसकी मजबूरी भी समझी जा सकती है। लेकिन इस घटना ने सरकारी सिस्टम की कलई खोल दी है। बेटियों की भलाई और पढ़ाई के लिए तमाम योजनाएं केंद्र व प्रदेश सरकारों ने चला रखी हैं लेकिन इनका लाभ जरूरतमंदों को देने में अफसर नाकाम हैं।