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रामपुर: जौहर ट्रस्ट से छीने यतीमखाना वक्फ के अधिकार, प्रशासक नियुक्त कर फिर से बहाल की गई किराएदारी

Thu, 28 May 2020 08:40 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर
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जौहर ट्रस्ट - फोटो : अमर उजाला
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सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट से यतीमखाना वक्फ संपत्ति का अधिकार छीन लिया है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने इस वक्फ के लिए बोर्ड के ही कार्यपालक अधिकारी (ईओ) जुनैद खान को प्रशासक नियुक्त किया है। 

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जुनैद खां ने अपनी नियुक्ति के बाद यतीमखाना से हटाए गए 26 किराएदारों की किराएदारी फिर से बहाल कर दी है। सपा शासनकाल के दौरान 2016 में आजम खां प्रदेश के वक्फ मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वक्फ संख्या 157 यतीमखाना से किराएदारों को बेदखल कर संपत्ति पर कब्जा कर लिया था। 

यहां से किराएदारों को हटाकर जमीन पर बुल्डोजर चलवाया गया और इस वक्फ संपत्ति का अधिकार अपनी अध्यक्षता वाले जौहर ट्रस्ट को सौंप दिया था। इस जमीन पर ट्रस्ट के अधीन संचालित होने वाले रामपुर पब्लिक स्कूल की विशाल बिल्डिंग का निर्माण शुरू कर दिया गया था। 
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इसे लेकर विरोध भी हुआ था, लेकिन अब तक जौहर ट्रस्ट इस पर अपना कब्जा बनाए हुए था। इस मामले को लेकर सांसद आजम खां सहित कई लोगों पर 12 मुकदमे भी दर्ज हैं। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने नक्शा पास न होने के आधार पर इस भवन को गिराने का नोटिस भी जारी किया था।

गुरुवार को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के कुछ दस्तावेज सामने आए हैं। 20 मार्च को बोर्ड के सीईओ एसएम शुएब की ओर से यह आदेश जारी किया गया था। जिसमें बोर्ड के ईओ जुनैद खां को वक्फ संख्या 157 यतीमखाना का प्रशासक नियुक्त किया गया था। 

जौहर ट्रस्ट से इस संपत्ति का अधिकार छीनकर नए प्रशासक को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इसकी प्रति रामपुर के डीएम और एसपी समेत जौहर ट्रस्ट को भी तभी भेज दी गई थी। प्रशासक नियुक्ति वाले दिन ही जुनैद खां ने एक आदेश जारी कर सभी बेदखल किए गए किराएदारों की किराएदारी बहाल कर दी है। 

इस संपत्ति को लेकर चर्चा में आई 90 साल की महिला शहजादी बेगम समेत कई लोगों को किराएदारी रसीद भी दी गई है। गुरुवार को कांग्रेस नेता फैसल खां ने मीडिया को पत्र की प्रतियां जारी कीं।
 

देर से ही सही, लेकिन सच्चाई की जीत हुई : फैसल खां

इस मामले को लेकर लंबी लड़ाई लड़ने वाले पूर्व कांग्रेसी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता फैसल खां लाला ने कहा है कि देर से सही सच्चाई की जीत हुई है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ के आदेश की कॉपी सार्वजनिक करते हुए फैसल ने कहा कि यह यतीमखाना में रहने वाले 26 गरीब परिवारों की जीत है। 

उन्होंने कहा कि यतीमखाना की जगह पर आजम खां ने जो बिल्डिंग बनाई है उसे गिरवा कर किराएदारों को पहले की तरह दे दिया जाए। फैसल ने कहा कि इस मामले को लेकर वो जल्द ही डीएम से मिलेंगे। 

बिल्डिंग गिराकर यतीमों को कब्जा दिलाया जाए: नवेद मियां 
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने यतीमखाना वक्फ की संपत्ति से जौहर ट्रस्ट का कब्जा हटाकर प्रशासक नियुक्त किये जाने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यतीमखाना वक्फ संख्या 157 का मैं ही मुतवल्ली था। 

सपा शासनकाल में मुझे गलत तरीके से हटाकर आजम ने यतीमों की जमीन कब्जा ली थी। इस जेडए जमीन की खतौनी में आज भी मेरा नाम दर्ज है। सबसे पहले मैंने ही इन 26 लोगों को किराएदारी दी थी और अब फिर से इन लोगों को किराएदारी मिलने से मुझे खुशी महसूस हुई है। 

 
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इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर का जिला प्रशासन बधाई का हकदार है। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह की कोशिश से ही गरीब यतीमों को ईद का तोहफा मिला है। नवेद मियां ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मांग की है कि जौहर ट्रस्ट द्वारा बनाई गई बिल्डिंग गिराकर यतीमों को उनकी जमीनों पर कब्जा दिलाया जाए। 

रियासत काल में यतीमों के लिए दी गई थी जमीन 
यतीमखाना की जमीन रियासत काल में वक्फ की गई थी। स्वतंत्रता के बाद यहां कई गरीबों और यतीमों को रहने के लिए किराए पर भूखंड दिए गए थे। किराएदारी के बाद इन लोगों ने यहां पर अपने मकान बना लिए थे।
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