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UP: लोकसभा चुनाव से शुरू हुई थी नदवी और आजम परिवार के बीच तल्खी, जौहर विवि में एंट्री न मिलने पर कही ये बात

Sun, 19 Jul 2026 01:57 PM IST
Sharukh Khan मृगांक पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर

सार

लोकसभा चुनाव से आजम परिवार और सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के बीच तल्खी शुरू हुई थी। आजम रामपुर सीट से नदवी को उम्मीदवार बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे। अखिलेश यादव को सैफई परिवार से किसी को मैदान में उतारने का सुझाव दिया था। 
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रामपुर में जाैहर यूनिवर्सिटी पर संकट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सपा नेता आजम खां के सपनों से तामीर हुई जौहर यूनिवर्सिटी में शनिवार को पार्टी के ही सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को यूनिवर्सिटी गेट पर रोक दिए जाने का घटनाक्रम सपा ही नहीं अन्य दलों में भी चर्चा का विषय बन गया। ज्यादातर लोगों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के समय से आजम खां परिवार और नदवी के बीच पैदा हुई तल्खी अभी खत्म नहीं हुई है। 

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जौहर यूनिवर्सिटी के 28 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से सांसद नदवी ने इस मुद्दे के जरिये आजम परिवार के करीब आने की पहल की है लेकिन शनिवार की घटना ने साफ कर दिया कि आजम परिवार ने नदवी के प्रति रुख नहीं बदला है।

साल 2024 में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के समय आजम खां जेल में थे। मुकदमों में अदालत से सजा मिलने के कारण उनके या बेटे के चुनाव लड़ने के रास्ते बंद थे। लिहाजा उस समय उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव को रामपुर की सीट से सैफई परिवार के किसी शख्स को चुनाव मैदान में लाने का सुझाव दिया था। 

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उम्मीदवारों की घोषणा के दौरान अखिलेश यादव ने रामपुर जिले के मूल निवासी लेकिन दिल्ली की एक मस्जिद में इमामत करने वाले मौलाना नदवी को रामपुर सीट से सपा प्रत्याशी बना दिया था। इससे न सिर्फ आजम खां और उनका परिवार असंतुष्ट हुआ बल्कि तब रामपुर के कई सपा नेताओं ने नदवी को चुनाव न लड़ाने का एलान भी कर दिया था।

पार्टी के भीतर की इस अंदरूनी खींचतान को कम करने के लिए अखिलेश यादव ने तब मुरादाबाद सीट पर एक प्रयोग किया। मुरादाबाद से सपा उम्मीदवार बनाए गए पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का अंतिम समय में टिकट काटकर रुचि वीरा को प्रत्याशी बना दिया था। 

 

इस फैसले से पहले आजम खां मुरादाबाद सीट की उम्मीदवारी के लिए पार्टी अध्यक्ष को यही सुझाव दे चुके थे। इन दोनों प्रयोगों से सपा रामपुर और मुरादाबाद सीटें जीतने में तो कामयाब हो गई लेकिन आजम और उनके परिवार के इर्दगिर्द घूमने वाली सपा की सियासत में नदवी के रूप में नए चेहरे का उदय आजम परिवार को नागवार गुजरा था। तब से दोनों के बीच कभी नजदीकी देखने को नहीं मिली। 

हाल ही में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ जारी आदेश के बाद से नदवी ने यूनिवर्सिटी की हिफाजत पर जोर देने के साथ आजम परिवार के करीब आने की कोशिश शुरू की है। शनिवार को यूनिवर्सिटी जाने से पहले उन्होंने इसकी सुरक्षा के लिए मीडिया को बयान दिया था। साथ ही दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे वांगचुक के आंदोलन में डिंपल यादव समेत अन्य सपा नेताओं के साथ पहुंचकर वहां भी जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया था।

सपा सांसद को जौहर यूनिवर्सिटी में घुसने से रोका, गेट से ही लौटे
रामपुर के सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी शनिवार को जौहर यूनिवर्सिटी गए, लेकिन उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने गेट पर ही रोक दिया। करीब आधे घंटे गेट पर इंतजार के बाद भी प्रवेश न मिलने पर वह वापस लौट गए। वापसी करने से पहले नदवी ने वहां मौजूद मीडिया के सवालों के जवाब दिए। 

 

यूनिवर्सिटी की हिमायत करते हुए कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी पर रामपुर या आसपास के क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति राजनीति नहीं करना चाहता। यह शैक्षणिक संस्थान पूरे हिंदुस्तानी समाज का है, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के हजारों बच्चे एक साथ मिलकर अपना भविष्य संवार रहे हैं। 

अखिलेश यादव का पैगाम लेकर आया था: नदवी
सरकार संस्थानों को शख्सियत से न जोड़े। विश्वविद्यालयों को किसी एक शख्सियत से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हमेशा पॉजिटिव सियासत करते हैं। मैं उनका ही पैगाम लेकर आया था। हमारी पार्टी की हमेशा कोशिश रही है और आगे भी रहेगी कि तालीमी इदारों को राजनीति से पूरी तरह दूर रखा जाए।

मेहनत से बनी यूनिवर्सिटी का प्लास्टर भी न गिरे
एक सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि हम बिल्कुल यह नहीं चाहेंगे कि यूनिवर्सिटी का एक प्लास्टर भी गिरे। यह संस्थान लोगों की गाढ़ी कमाई और कड़ी मेहनत से बना है। हम सभी इस इबादतखाने की इज्जत और एहतराम करते हैं। 

 

यह यूनिवर्सिटी आजम खां की कड़ी मेहनत और कोशिशों से कायम की गई थी। इसके निर्माण से लेकर आज तक पूरी पार्टी और यहां तक कि बाहर के लोगों ने भी हमेशा इसे पूरा समर्थन दिया है। कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी के नाम पर रामपुर की जनता में कभी कोई मतभेद नहीं था, न है और न ही आगे रहेगा। 

यूनिवर्सिटी के भीतर न जा पाने के मामले में सफाई भरे लहजे में उन्होंने कहा कि इंतजामियां की कुछ मजबूरियां रही होंगी, वहां पढ़ने-पढ़ाने वालों के काम में खलल न पड़ने की वजह भी हो सकती है। हम डिस्टर्ब करने नहीं यूनिवर्सिटी के बचाव की बात के लिए आए हैं।
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इस दौरान सांसद के साथ बदन सिंह यादव, महबूब अली पाशा, पंडित छत्रपाल शर्मा, अनीता यादव, हाफिज अब्दुल सलाम और अतर सिंह कोटिया, तेजेंद्र सिंह ब्रिक, सुरेंद्र सागर मौजूद रहे।
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