नोटबंदी के बाद बुजुर्ग फकीर अहमद जमा पैसा निकालने के लिए बैंक का चक्कर लगाते रहे। सुबह शाम बैंक के बाहर धक्के खाते रहे। उन्हें तो फूटी कौड़ी नहीं मिल, लेकिन ‘अमीर’ लेन देन करते रहे और वह अंजान रहे।
चार नवंबर से उन्नीस दिसंबर के बीच उनके खाते में पैसे भी जमा किए गए और निकाले भी गए। जबकि फकीर अहमद ने आखिरी बार 21 जुलाई को अपने खाते का इस्तेमाल किया था। पासबुक प्रिंट कराने पर अमीर चंदों के लेने देन का मामला सामने आया।
मूढ़ापांडे थानाक्षेत्र के ग्राम अक्का डिलारी निवासी किसान फकीर अहमद (70) पुत्र मुनीर अहम का प्रथमा बैंक की अक्का डिलारी शाखा में खाता है। फकीर अहमद के मुताबिक आखिरी बार 21 जुलाई 2016 को अपने खाता संख्या 20069003707 से एक हजार रुपये निकाले।
खाते में 3087 रुपये बैलेंस रहा। इसके बाद उन्होंने खाते में न तो पैसा जमा किया और न ही निकाला। आठ नवंबर की आधी रात से नोट बंदी होने पर उन्हें पैसे जरूरत महसूस हुई तो वह बैंक का चक्कर लगाने लगे। लेकिन पैसा नहीं निकाल सके।
19 दिसंबर को भी वह पैसा निकालने बैंक पहुंचे, लेकिन कैश खत्म हो गया। बाद में पासबुक प्रिंट कराकर घर चले गाए। घर पहुंचकर पासबुक देखा तो वह सिर पकड़ लिया। खाते में 3087 रुपये की जगह 129222 रुपये जमा थे।
यही नहीं पासबुक पर हुए प्रिंट के मुताबिक उनके खाते से चार नवंबर से उन्नीस दिसंबर के बीच सात बार पैसे जमा किए गए और निकाले गए। जबकि वह इस लेन देन से वह अंजान रहे।