12 साल पूर्व पुलिस हिरासत से फरार एक लाख रुपये के इनामी आरोपी को जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ मुरादाबाद समेत कई जिलों में 11 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस की आंखों में सालों से धूल झोंकने वाले आरोपी को पुलिस ने उसकी पत्नी के बैंक खाते की छानबीन के बाद अमरोहा स्टेशन से दबोचा है। बदमाश पत्नी को हर महीने कटिहार (बिहार) पैसे भेजता था।
सीओ (रेलवे) डा. संतोष कुमार ने बताया कि कटिहार (बिहार) निवासी हरपाल सैनी अपने दोस्त अमरोहा निवासी राकेश शर्मा के साथ ट्रेनों में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था। वर्ष 2006 में पुलिस ने हरपाल सैनी और उसके साथी राकेश शर्मा को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को लखनऊ एडवाइजरी बोर्ड में पेशी से वापस पुलिस हिरासत में मुरादाबाद जेल के लिए लाया जा रहा था। 13 अक्तूबर 2006 रात करीब ढाई बजे रेलवे स्टेशन कटघर आउटर के पास रामगंगा नदी पुल पर हरपाल सैनी और राकेश हथकड़ी समेत चलती ट्रेन से कूद गए।
दोनों आरोपियों के फरार होने पर चार पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर दिया, लेकिन आरोपियों का सुराग नहीं लगा। सीओ के मुताबिक पुलिस की ताबड़तोड़ दबिशों के बाद 2010 में राकेश शर्मा को दबोच दिया, जबकि हरपाल सैनी पुलिस के हाथ नहीं आया था। वह नाम बदलकर उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, झारखंड, हरियाणा, पंजाब और बिहार में रह रहा था। वहां वह बेलदारी का काम करता था। उसकी गिरफ्तारी नहीं होने पर रेलवे डीजी ने 2006 में ही 15 हजार का इनाम घोषित कर दिया। उसकी गिरफ्तारी नहीं होने पर डीजी की ओर से इनाम की राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की नए सिरे से तलाश शुरू की गई। एक टीम को बिहार भेजा गया। वहां पत्नी राधा से पूछताछ और गैस कनेक्शन एवं बैंक खाते की जानकारी जुटाई गई। बैंक खाते की छानबीन करने पर पता चला कि हरपाल सैनी पत्नी को हर महीने खर्चे के लिए पैसे भेजता है। इससे उसकी लोकेशन का पता चल गया। हरपाल सैनी अमरोहा में रह रहा था। जीआरपी निरीक्षक पंकज पंत के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने अमरोहा स्टेशन से प्लेटफार्म नंबर एक से आज सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया। वह अपने घर बिहार जाने के लिए स्टेशन आया था। हरपाल सैनी के कई उपनाम हैं। वर्तमान में वह अमरोहा में किराये पर रहकर बेलदारी कर रहा था। हरपाल के खिलाफ अमरोहा, संभल, मेरठ और मुरादाबाद में 11 मुकदमे दर्ज हैं।