मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए का आतंक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वन विभाग के हर व्यूह को तोड़ रहा तेंदुआ
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग हर घटना के बाद नया जाल बिछा रहा है, लेकिन तेंदुआ हर बार विभाग के इंतजामों को मात दे रहा है। पिंजरे लगाए गए, ड्रोन से निगरानी कराई गई और बाद में तकनीक का सहारा लेते हुए एनिडर डिवाइस भी लगाए गए, लेकिन तेंदुए की चाल के सामने अब तक कोई रणनीति कारगर साबित नहीं हुई।
मुरादाबाद में तेंदुए का आतंक
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तेंदुए के लगातार हमलों ने वन विभाग की निगरानी और पकड़ने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर हमले के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाता है। इसके बाद भी तेंदुआ पिंजरे के आसपास घूमकर निकल जाता है, लेकिन उसमें फंसता नहीं।
तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में महिला की जान लेने के बाद अभियान शुरू हुआ। इसके बाद वन विभाग ने संभावित इलाकों में पिंजरे लगाए और निगरानी बढ़ाई। ड्रोन उड़ाकर गन्ने के खेतों और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की तलाश की गई। इसके चार दिन बाद तेंदुआ फंसा।
इसके बाद तेंदुए ने बहापुर बलिया में अलग-अलग स्थानों पर ग्रामीणों को निशाना बनाया। विभाग ने स्थान बदलकर पिंजरे लगाए, ताकि तेंदुए की आवाजाही के रास्ते को भांपा जा सके। लेकिन हर बार तेंदुआ पिंजरे और निगरानी के घेरे से बच निकला। इससे साफ है कि केवल एक स्थान पर पिंजरा लगाने से उसे पकड़ना आसान नहीं है।
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए का आतंक
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विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। टीमें 24 घंटे सक्रिय हैं। दूसरे जनपदों की टीमों का सहारा लिया जा रहा है। फिर भी लगातार घटनाएं हो रही हैं इसलिए तेंदुओं को आदमखोर घोषित करने और गोली मारने की अनुमति मांगी गई है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, डीएफओ