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मुरादाबाद में आदमखोर की दहशत: बहापुर बलिया पर तेंदुए का बार-बार वार, हर जुबां पर एक सवाल, कौन है अगला शिकार

Sun, 30 Aug 2026 02:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा इलाके में लगातार तेंदुओं के हमले बढ़ते जा रहे हैं। इलाके में एक माह के भीतर तेंदुआ चार लोगों की जान ले चुका है। इसमें तीन महिलाएं शामिल है। हमले बढ़ने के साथ ही वन विभाग लाचार बना हुआ है। 
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ठाकुरद्वारा में पकड़ा गया तेंदुआ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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ठाकुरद्वारा का गांव बहापुर बलिया इस समय आदमखोर तेंदुए के खौफ में है। पहले ब्रह्मोे देवी, फिर मिथिलेश और अब जगराज सैनी की जान तेंदुआ ले चुका है। दोनों महिलाओं को गांव के पास ही खेतों पर मारा था जबकि जगराज को घर से सोते हुए तेंदुआ उठाकर ले गया।

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अब हर किसी को यही डर सता रहा है कि तेंदुए का अगला शिकार कौन होगा। लोग यहां तक कह रहे हैं कि तेंदुए के मुंह इंसानी खून लग चुका है लिहाजा जब तक उसे मारा नहीं जाएगा वह हमले करता रहेगा। तेंदुए ने 18 अगस्त को इस गांव की ब्रह्ममो देवी पर खेत पर काम करते समय हमला किया था।

मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। दूसरा हमला 25 अगस्त को शाहपुर बलिया निवासी मिथिलेश देवी पर हुआ था। मिथिलेश को खेत पर काम करते समय तेंदुआ पति के सामने से खींचकर ले गया था। जब तक लोग दौड़े मिथिलेश की मौत हो चुकी थी। अब तेंदुआ इस गांव में घुस गया और जगराज सैनी को घर में सोते वक्त उठाकर ले गया और मार डाला।
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तेंदुए ने एक गांव के तीन लोगों की जान ले ली है। इससे गांव के लोग भारी दहशत में हैं। गांव निवासी राजेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में हर कोई खौफ में है। पिंजरा लगाने से कुछ होने वाला नहीं नहीं। अब तो आदमखोर तेंदुए को मार देना चाहिए। हमारे गांव के लोग मारे जा रहे हैं।

नरेश कुमार का कहना था कि रात को बिजली रहनी चाहिए। लेकिन रात को बत्ती रहती नहीं। हम लोग डर के बीच रह रहे हैं। अक्षय कुमार सैनी का कहना था कि अब तो यही डर लगा रहता है कि तेंदुआ कब और कहां आ जाए। खेतों पर नहीं जा सकेंगे तो खेती कैसे होगी।

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए का आतंक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

वन विभाग के हर व्यूह को तोड़ रहा तेंदुआ
 तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग हर घटना के बाद नया जाल बिछा रहा है, लेकिन तेंदुआ हर बार विभाग के इंतजामों को मात दे रहा है। पिंजरे लगाए गए, ड्रोन से निगरानी कराई गई और बाद में तकनीक का सहारा लेते हुए एनिडर डिवाइस भी लगाए गए, लेकिन तेंदुए की चाल के सामने अब तक कोई रणनीति कारगर साबित नहीं हुई।

मुरादाबाद में तेंदुए का आतंक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

तेंदुए के लगातार हमलों ने वन विभाग की निगरानी और पकड़ने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर हमले के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाता है। इसके बाद भी तेंदुआ पिंजरे के आसपास घूमकर निकल जाता है, लेकिन उसमें फंसता नहीं।

तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में महिला की जान लेने के बाद अभियान शुरू हुआ। इसके बाद वन विभाग ने संभावित इलाकों में पिंजरे लगाए और निगरानी बढ़ाई। ड्रोन उड़ाकर गन्ने के खेतों और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की तलाश की गई। इसके चार दिन बाद तेंदुआ फंसा।

इसके बाद तेंदुए ने बहापुर बलिया में अलग-अलग स्थानों पर ग्रामीणों को निशाना बनाया। विभाग ने स्थान बदलकर पिंजरे लगाए, ताकि तेंदुए की आवाजाही के रास्ते को भांपा जा सके। लेकिन हर बार तेंदुआ पिंजरे और निगरानी के घेरे से बच निकला। इससे साफ है कि केवल एक स्थान पर पिंजरा लगाने से उसे पकड़ना आसान नहीं है।

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मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में तेंदुए का आतंक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। टीमें 24 घंटे सक्रिय हैं। दूसरे जनपदों की टीमों का सहारा लिया जा रहा है। फिर भी लगातार घटनाएं हो रही हैं इसलिए तेंदुओं को आदमखोर घोषित करने और गोली मारने की अनुमति मांगी गई है। - डॉ. विनय कुमार सिंह, डीएफओ
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