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रजा लाइब्रेरी-राज्यपाल

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रामपुर। प्रदेश की राज्यपाल एवं रामपुर रजा लाइब्रेरी बोर्ड की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने कहा कि रामपुर रजा लाइब्रेरी विश्व का अनमोल खजाना है। लाइब्रेरी में 150 चित्रित पांडुलिपि हैं और यहां के संग्रह के बारे में बताया जाता है कि 205 ताड़पत्र, 3000 कैलीग्राफी, अन्य संग्रहित कैलीग्राफी और सभी पांडुलिपियों का अपना अलग-अलग महत्व है। हम चाहते हैं कि इन पांडुलिपियों और पुस्तकों का गुजराती में अनुवाद हो, ताकि वहां के लोगों को भी ज्ञान के इस सागर का लाभ मिल सके।
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राज्यपाल सोमवार सुबह रजा लाइब्रेरी पहुंची। यहां पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और पुरस्कार वितरण समारोह में शिरकत की। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि रामपुर रजा लाइब्रेरी विश्व में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और इसके संग्रह से लाभान्वित होने के लिए इधर-उधर से शोधार्थी आते हैं। कहा कि सुमेर चन्द द्वारा लिखित रामायण की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भेंट की थी, जो लाइब्रेरी के लिए गौरवान्वित होने वाली बात है। कहा कि मैंने अनेक स्थानों की लाइब्रेरी को देखा है, लेकिन इतनी भव्य लाइब्रेरी पहली बार देखी है। यहां बहुत ही अद्भूत रचनाएं हैं। उन्होंने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी देश की 130 करोड़ जनता के लिए गौरवान्वित होने की बात है।
यहां ऐसे कार्यक्रम भी होने चाहिए, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों को लाभ मिले। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्होंने किताबें लिखने में अपनी जिंदगियां खपा दीं। बोली कि लाइब्रेरी एवं यूनिवर्सिटी का तालमेल होना चाहिए। विद्यार्थियों को दिशा देने के लिए लाइब्रेरी का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होना चाहिए। ये बहुत ही खूबसूरत लाइब्रेरी है। यहां समाहित ज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया में फैले। उन्होंने रजा लाइब्रेरी की पुस्तकों और पांडुलिपियों के गुजराती अनुवाद किए जाने की भी इच्छा जताई, जिससे गुजरात के लोगों को भी इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जीएस ख्वाजा ने किया। इससे पहले राज्यपाल ने लाइब्रेरी में संग्रहीत रामायण की पेंटिंग एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
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