ठाकुरद्वारा थाने के साढ़े तीन साल पुराने छात्रा को अगवा कर बलात्कार के मामले में फार्स्ट ट्रैक कोर्ट दो के जज मनोज कुमार अग्रवाल ने एक अभियुक्त को सात साल की सजा और दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने के आदेश दिए हैं। सरकार की ओर एडीजीसी मो. फहीम कुरैशी ने पक्ष रखा।
ठाकुरद्वारा थाने में एक किसान ने सितंबर 2012 में फतेहउल्लागंज निवासी गुड्डू पुत्र जबर सिंह, मिन्टू पुत्र हरि सिंह और भयंकर उर्फ विजेंद्र कु मार पुत्र सुरेंद्र सिंह निवासी गोपीवाला के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
किसान ने आरोप लगाया था कि 13 सितंबर 2012 को वह अपनी पत्नी के साथ खेत पर गया था। उसकी नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। इसी बीच आरोपी उसकी बेटी को अगवाकर जंगल में ले गए और गुड्डू ने उसके साथ बलात्कार किया। छात्रा के विरोध करने पर आरोपी मिन्टू और भयंकर ने उसे तमंचा दिखाकर डराया धमकाया था।
पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। केस की सुनवाई एफटीसी दो की अदालत में चली। सरकार की ओर से एडीजीसी मो. फहीम कुरैशी ने पक्ष रखा। जज मनोज कुमार अग्रवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्त गुड्डू को घटना का दोषी माना है।
उन्होंने अभियुक्त को अपहरण के मामले में पांच साल की सजा सुनाई है और पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जबकि अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इसके अलावा बलात्कार की धारा 376 में सात साल की सजा और दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जबकि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के लिए अभियुक्त को दस हजार रुपये देने होंगे। जबकि मिन्टू और भयंकर उर्फ विजेंद्र को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है।