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Moradabad News: शहर की सूरत बिगाड़ रहे बेतरतीब होर्डिंग, 70 प्रतिशत अवैध

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मुरादाबाद। शहर की सड़कों पर कदम रखते ही सबसे पहले नजर पड़ती है बिजली के खंभों, डिवाइडरों, इमारतों की दीवारों और छतों पर टंगे विज्ञापन बोर्डों पर। अवैध होर्डिंग और बैनरों की यह भरमार न सिर्फ ट्रैफिक के लिए खतरा बनती है बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। निगम के निरंतर अभियान चलाए जाने के बावजूद इन पर नकेल नहीं लग पा रही है।
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स्थिति यह है कि शहर में जहां-तहां विज्ञापन सामग्री टांगी जा रही है लेकिन निगम के रिकॉर्ड में केवल 134 होर्डिंग व यूनीपोल को ही वैध अनुमति प्राप्त है। इनमें 60 यूनीपोल, 56 बड़े होर्डिंग और 18 सेंट्रल पोल क्योस्क बोर्ड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दस यूनीपोल एंट्री गेट पर अधिकृत बताए गए हैं। वहीं 618 छोटे पोल क्योस्क भी निगम की ओर से विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं। लेकिन इन वैध होर्डिंग-यूनिपोल के अतिरिक्त सैकड़ों की संख्या में होर्डिंग और बड़े-बड़े बैनर बिना किसी अनुमति के भी लगे हुए हैं। पुराने शहर में लगे 70 प्रतिशत होर्डिंग व बैनर अवैध तरीके से ही लगे हुए हैं।
नगर निगम ने विज्ञापन प्रबंधन की जिम्मेदारी दो एजेंसियों को सौंपी हुई है। एक को एंट्री गेट से जुड़े यूनीपोल और दूसरी एजेंसी को शहर के अन्य यूनीपोल व होर्डिंग की अनुमति का अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद जमीन पर हालात बिगड़े हुए नजर आते हैं। सिर्फ शहर के भीतर ही नहीं बल्कि निगम सीमा के बाहर भी बड़े पैमाने पर अवैध रूप से होर्डिंग-यूनीपोल अवैध रूप से लगाए गए हैं जिन पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
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कांठ रोड, दिल्ली रोड, रामपुर रोड, रेलवे स्टेशन रोड समेत पुराने शहर के मोहल्लों में कई स्थानों पर बड़े आकार के विज्ञापन बोर्ड लगे हुए हैं। गागन तिराहे से बाइपास रोड, रामपुर रोड स्थित जीरो प्वाइंट और कांठ रोड पर अगवानपुर तक अवैध होर्डिंग की कतारें दिखाई देती हैं। कई स्थानों पर तो बोर्ड सड़क किनारे इतने नीचे लगाए गए हैं कि वाहन चालकों का भी ध्यान भटकता है।

- हर साल होता है लाखों का नुकसान
इन अवैध विज्ञापनों से नगर निगम को राजस्व का भी बड़ा नुकसान हो रहा है। अधिकृत होर्डिंग से जहां नियमित शुल्क मिलता है वहीं बिना अनुमति लगे बोर्डों से निगम को प्रतिवर्ष लाखों रुपये की चपत भी लग रही है। साथ ही बरसात और तेज हवा के दौरान ऐसे बेतरतीब बोर्ड के गिरने का खतरा भी बना रहता है। कई शहरों में होर्डिंग गिरने से हादसे भी हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद शहर में निगम इन खतरों को अनदेखा कर रहा है।


- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी होता है उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि सड़क किनारे लगे होर्डिंग हटाए जाएं क्योंकि यह होर्डिंग यातायात व्यवस्था के लिए खतरा बनते हैं। सिर्फ मार्ग संकेतक बोर्ड या होर्डिंग ही लगाए जा सकते हैं।

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अवैध होर्डिंग लगाने वालों पर कार्रवाई होगी और उनसे जुर्माना भी वसूला जाएगा। निगम की टीम नियमित रूप से इसके खिलाफ अभियान चलाती है। - विनोद अग्रवाल, महापौर
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