कांठ। प्रशासन द्वारा गठित श्री रामलीला मंचन समिति (अस्थाई) के द्वारा नगर में कराए जा रहे 116 वें श्री रामलीला मंचन में कलाकारों द्वारा सोमवार को रंगमंच पर दिखाया गया कि राजा दशरथ के महल में भगवान श्री राम के विवाह की खुशियां हर ओर थीं। इसी खुशी के माहौल में एक दिन राजा दशरथ के मन में आया कि वह अब जीवन के चौथे पड़ाव में पहुंच गए हैं। राजपाट बड़े पुत्र राम को सौंपकर वनों में तपस्या करें। राजा के प्रस्ताव पर सभी ने सहमति जताई। महल में राम के राजतिलक की तैयारी चल रही थी। उधर मंथरा ने रानी कैकई को राम और राजा दशरथ के प्रति बरगलाना शुरू कर दिया। चुगली करके उसने राम के स्थान पर भरत को राजतिलक की मांग रखी। पहले तो कैकई से उसे बुराभला कहा लेकिन बाद में रानी ने भी उसकी हां में हां कर दी। वह कोपभवन चली गई। रा