दिल्ली रोड स्थित गागन नदी का हाल कैसे करे गंगा स्नान।
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मुरादाबाद। कार्तिक पूर्णिमा पर रामगंगा नदी में आस्था का गोता लगाना स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। सीवरेज का दूषित पानी रामगंगा नदी में आ रहा है। फैक्टरियों का केमिकल युक्त पानी व अन्य दूषित अवयव भी नदी में ही डाले जा रहे हैं। लगातार दूषित और रासायनिक तरल पदार्थ गिरने से नदी में बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड की मात्रा मानक से अधिक है। इसके अलावा कालीफॉर्म बैक्टीरिया भी मानक से 755 गुना अधिक है। मानक के अनुसार कालीफार्म प्रति लीटर 50 होने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार मानव स्वास्थ्य के लिए प्रदूषण का यह स्तर खतरनाक हो सकता है। नदी का पानी नहाने या आचमन के लायक नहीं है।
शहर के नाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित होने के बजाय सीधे रामगंगा में गिर रहे हैं। इसकी वजह से अगवानपुर में काफी हद तक स्वच्छ रामगंगा नदी लालबाग क्षेत्र में पहुंचते-पहुंचते मैली हो जाती है। कई जगह तो रामगंगा इतनी काली हो गई है कि गंदे नाले में जमी कीचड़ के समान दिखाई देती है। कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु भी लालबाग में काली मंदिर के घाट के पास ही नदी में डुबकी लगाने के अलावा अन्य अनुष्ठान करते हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी आलोक शर्मा ने बताया कि बीओडी का मानक 8.7 हो जाना बहुत ही ज्यादा प्रदूषण का सूचक है। आमतौर पर यह खेती लायक भी नहीं होता है। चार मिली ग्राम प्रति लीटर होने पर पारंपरिक उपचार और कीटाणु शोधन के बाद पीने के पानी का स्रोत बनता है। लालबाग क्षेत्र में सीवर का पानी आ जाता है। डिजोल्व ऑक्सीजन का स्तर मानक के अनुरूप होने की वजह से कुछ राहत हो सकती है। कालीफार्म का स्तर पूरे प्रदेश में मानकों से अधिक होता है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर जनवरी से सितंबर माह तक की रिपोर्ट का औसत
अगवानपुर रामपुर रोड ब्रिज (लालबाग)
डीओ बीओडी कॉलीफार्म डीओ बीओडी कॉलीफार्म
8.3 2.0 2022 पांच 8.7 37778
नोट: डीओ (डिजोल्व ऑक्सीजन), (बीओडी) बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड।