फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले गोदाम बने, उसके बाद में बनाया कृषि कानून : राकेश टिकैत

विज्ञापन
बिलासपुर से किसानों को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए भाकियू प्रवत्ता राकेश टिकैत। - फोटो : CITY
विज्ञापन
मुरादाबाद। बिलासपुर से किसानों को लेकर नियामतपुर इकरोटिया टोल प्लाजा होते हुए भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत दिल्ली की ओर रवाना हो गए । इस दौरान टोल प्लाजा पर उन्होंने कहा कि देश में यदि कानून होता तो किसान का गन्ना 150 रुपये कुंतल न बिकता। कृषि कानून पूंजीपतियों के लिए बना है तभी तो देश में पहले उन्होंने अपने गोदाम बना लिए उसके बाद सरकार ने कानून बनाया। कहा कि कानून वापस होने तक विरोध जारी रहेगा।
विज्ञापन

टिकैत ने कहा कि गन्ना भाव शुगर मिल पर लागू होता है। मिल के बाहर लगे कोल्हू वाले ही काफी कम रेट पर गन्ना लेता है, क्योंकि कानून नहीं है, इसलिए वह मंदे में लेता है। इसलिए हम चाहते हैं कि एमएसपी पर कानून बन जाए ताकि कोई किसान का गन्ना 150 में न ले। इस बार धान की लुटाई हुई है। 800 से एक हजार रुपये तक में खरीद हुई है। न किसी सरकार का सपोर्ट मिला, ना प्रशासन का न ही किसी नेता का। 14 दिन में गन्ना भुगतान का एक्ट है लेकिन अगले साल तक जाकर भुगतान होता है। आज पीएम कह रहे हैं किसान को करोड़ों दे दिया है। वह तो हमारा कर्जा था, वो तो देना ही था। इसमें कहने की क्या जरुरत है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार यह किसान एक्ट वापस ले ले बाद में जरूरत होगी तो फिर से बना लेंगे। टोलप्लाजा नियामत पुर इकरोटिया पर टिकैत का स्वागत किया गया। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष महेन्द्र सिंह रंधाव,ा जिलाध्यक्ष मनोज कुमार, रामपुर के जिला अध्यक्ष मोहम्मद हसीब अहमदख्, ऋषिपाल सिंह, धर्मेश सिंह, नरेन्द्र प्रताप सिंह, माखन सिंह, जयवीर सिंह, अजय कुमार आदि उपस्थित थे।श्
पिछली घटना से ली सीख, किसानों को किसी ने नहीं टोका
मुरादाबाद। पिछले दिनों रामपुर में दिल्ली जा रहे किसानों को रोकने के बाद हुए बवाल के कारण शुक्रवार को पुलिस ने बदली हुई रणनीति पर काम किया। इकटोरिया टोल पर पुलिस बल तो तैनात किया गया था लेकिन किसानों को रोकने की कोशिश नहीं की गई। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत किसानों के साथ यहां पहुंचे लेकिन किसी को नहीं रोका गया। यही स्थिति ओर जगहों पर भी रही। दरअसल पिछले दिनों की घटना के बाद पुलिस प्रशासन फिर से कोई बखेड़ा नहीं चाहता था। सूत्रों के अनुसार ऊपर से भी दिशा निर्देश थे कि शांतिपूर्ण ढंग से जाने वालों को न टोका जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें