फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Moradabad News: रेलवे खाली हाथ, पुरानी परियोजनाओं पर ही होगा काम

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद।
विज्ञापन

बजट में मुरादाबाद रेल मंडल को कुछ नहीं मिला है। संरक्षित संचालन व पुरानी परियोजनाओं पर काम तेज करने की बात कही गई है। फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट की नई रेल लाइनें बिछाने व ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट को 2025 तक पूरा करने की बात इस बजट में भी दोहराई गई है।
पूरे मंडल में 407 किमी का रेलवे ट्रैक बदलकर नई पटरियां बिछाने पर जोर दिया गया है, जबकि यात्रियों को अनारक्षित ट्रेनों की घोषणा व किराये में राहत की उम्मीद थी। बुजुर्ग यात्रियों व खिलाड़ियों को किराये में मिलने वाली राहत बहाल नहीं की गई है। मुरादाबाद-मुंबई व मुरादाबाद-आगरा के बीच सीधी ट्रेन चलाने की मांग भी एक बार फिर दबी रह गई।
विज्ञापन

यात्रियों के अलावा रेलवे कर्मचारियों ने भी बजट को निराशाजनक बताया है। पुरानी पेंशन व इनकम टैक्स में रियायत न मिलने से निराशा व्यक्त की है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संरक्षा बिंदुओं पर काम किया जाएगा। बजट में इसी को महत्व दिया गया है। मुरादाबाद मंडल में ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए कवच तकनीक भी लगाई जाएगी। इसके लिए फंड जल्द मिलने की उम्मीद है।
बोले रेल कर्मचारी
बजट आशा के अनुरूप नहीं रहा। केंद्र सरकार का कर्मचारी आय पर कर देता है और हर खर्च पर जीएसटी भी अदा करता है। यह कर्मचारियों का दोहरा शोषण है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बजट से कुछ हाथ नहीं लगा है। - मनोज शर्मा, मंडल अध्यक्ष, नरमू
- पुरानी पेंशन पर बजट में कोई बात नहीं की गई। 10 लाख तक की आय कर मुक्त नहीं की गई। रेल आवासों के लिए बजट जारी नहीं किया गया। रेल कर्मियों को मिलने वाले भत्तों के लिए बजट में कुछ नहीं रहा। - शलभ सिंह, मंडल मंत्री, उरमू
बोले रेलयात्री
सामान्य श्रेणी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत की बात नहीं की गई। न किराया घटाया और न ही कोरोना में बंद की गई ट्रेनों को दोबारा चलाने की घोषणा हुई। मुरादाबाद से दिल्ली के बीच मेट्रो शटल चलाए जाने की उम्मीद धराशायी हो गई। - श्याम कुमार, सदस्य, दैनिक रेलयात्री संगठन
विज्ञापन

- खिलाड़ियों व बुजुर्गों को ट्रेन के किराये में मिलने वाली सुविधाएं बहाल नहीं की गई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करना अच्छा है, लेकिन यात्रियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था। - टीपी सिंह, सदस्य, दैनिक रेलयात्री संगठन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें