गोविंद नगर में प्रस्तावित फुट ओवरब्रिज को लेकर नगर निगम और रेलवे के अधिकारियों के बीच ठन गई है। जिसकी वजह से इस ब्रिज के लिए अभी और इंतजार करना होगा। नगर निगम को रेलवे का डिजाइन पसंद नहीं आ रहा है और रेलवे को निगम का सुझाव। शुक्रवार को नगर निगम ने रेलवे की ओर से प्रस्तावित किए गए संशोधित नक्शॉा भी वापस लौटा दिया। निगम का सुझाव है कि ब्रिज से हल्के वाहन निकलने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। जबकि रेल अफसरों का कहना है कि पहले से ही फुट ओवर ब्रिज है और सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए बनाया जाना है।
एफओबी निर्माण के लिए नगर निगम ने साढ़े पांच करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। जबकि रेलवे ने पहले एफओबी के लिए तीन करोड़ का बजट तैयार किया था, बाद में इसको बढ़ाकर साढ़े पांच करोड़ कर दिया गया। कमिश्नर ने इस विवाद को निपटाने के लिए नौ फरवरी को दोनों विभागों के अफसरों की बैठक बुलाई। जिसके लिए नगर निगम के बजट से साढ़े पांच करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए थे। रेलवे को भी नगर निगम की जरूरत के अनुसार ब्रिज निर्माण का सुझाव दिया था।
कमिश्नर की बैठक के बाद भी नक्शे का विवाद खत्म नहीं हुआ। रेलवे ने एफओबी का नक्शा कई-कई फीट के उतार-चढ़ाव वाले स्लैब का तैयार किया है। यह नक्शा निगम को स्वीकार नहीं है। निगम ने प्लेन स्लैब वाली डिजाइन तैयार करने के पत्र के साथ फाइल रेलवे को वापस भेज दी थी। उसके बाद शुक्रवार को रेलवे का संशोधित नक्शा निगम में पहुंचा।
उसमें स्लैब का उतार-चढ़ाव थोड़ा सा कम कर दिया गया था, लेकिन डिजाइन लगभग वही पहले वाला ही थी। रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि एफओबी पैदल यात्रियों के लिए बन रहा है। उतार-चढ़ाव से उनको चलने में आराम मिलेगा। वहीं निगम के इंजीनियरों का कहना है कि एफओबी को सामान्य तरीके से तैयार कराया जाएगा। जिससे इस पर होकर पैदल यात्रियों के साथ ही रिक्शा चालक और दो पहिया वाहन चालक भी निकल सकेंगे।