बिलारी क्षेत्र के सतारन गांव निवासी राकेश का 14 वर्षीय बेटा अतुल गांव के ही परिषदीय स्कूल में कक्षा सात का छात्र था। रोजमर्रा की तरह ही शनिवार को सुबह को भी गांव के ही दूसरे विद्यार्थियों के साथ स्कूल गया था। वह क्लासरूम में अपने साथियों के साथ जाकर बैठ गया और पढ़ाई शुरू कर दी।
क्लासरूम में मौजूद रहे उसके साथियों ने बताया कि वह बार-बार उठ रहा था। खींचकर सांस लेने की कोशिश कर रहा था। जब ज्यादा दिक्कत बढ़ी तो वह शिक्षामित्र विजय लक्ष्मी के पास पहुंचा और अपनी परेशानी बताई। शिक्षामित्र ने तत्काल पानी पिलाना चाहा तो वह पानी देखकर भागने और चीखने लगा।
ग्रिल पकड़कर चीखने लगा अतुल
स्कूल की तरफ से तत्काल परिवार वालों को सूचना भिजवाई गई। सूचना मिलने पर अतुल की चाची रामश्री स्कूल पहुंचीं। शिक्षामित्र और चाची उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बिलारी पहुंचीं। वहां अस्पताल के गेट पर लगी लोहे की ग्रिल पकड़कर अतुल चीखने लगा। उसे इस हालत में देखकर लोगों की भीड़ जुट गई।
गंभीर हालत के कारण वहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल से परिवार वाले उसे दिल्ली ले गए थे, शिक्षामित्र विजय लक्ष्मी के मुताबिक वहां रविवार की छात्र की मौत हो गई। अतुल के परिवार में उसके पिता राकेश, मां फूलकुमारी और तीन भाई बेटे रवि, नागेश व दीपांशु हैं।
कुत्ते को रोटी खिलाते समय लगा था नाखून, अनदेखी से गई जान
अतुल की चाची रामश्री ने बताया कि अतुल अक्सर मोहल्ले में घूमने वाले कुत्तों को रोटी खिलाता था। करीब दो माह पहले एक कुत्ते को रोटी खिलाते समय नाखून अतुल की उंगली में लग गया था।
सभी ने मामूली खरोंच समझी। एंटी रेबीज का टीका भी नहीं लगवाया। वहीं चिकित्साधीक्षक डॉ. राजपाल का कहना है कि परिजनों ने उन्हें नाखून लगने की नहीं कुत्ते के काटने की जानकारी दी थी।
शनिवार को अतुल के परिजन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे तो उन्हें बता दिया गया था कि यह रेबीज के लक्षण हैं। हालत ज्यादा खराब होने के कारण उसे फौरन जिला अस्पताल भेज दिया गया था। यदि उसे समय पर वैक्सीन लगती तो यह स्थिति नहीं होती।- डॉ. राजपाल सिंह, चिकित्साधीक्षक, बिलारी
छात्र अतुल की मौत: कुत्ते का सिर्फ नाखून लगने से भी हो सकता है रेबीज, डाॅक्टर बोले- जरूर लगवाएं वैक्सीन
कुत्ते का काटना ही नहीं, उसका नाखून लगने से त्वचा छिलना भी रेबीज के खतरे की वजह बन सकता है। ऐसे में मामूली खरोंच समझकर घाव को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बिलारी निवासी छात्र अतुल (12) की मौत के मामले ने रेबीज को लेकर सतर्कता की जरूरत फिर सामने ला दी है।
जिला अस्पताल में हर दिन कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। कुत्तों के हमलों के साथ टीकाकरण की जरूरत बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के नाखून से खरोंच लगने पर खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा कितनी छिली है और घाव में संक्रमित लार पहुंचने की आशंका है या नहीं। कुत्ते अपने पंजे चाटते हैं लेकिन केवल नाखून लगने से हर बार रेबीज नहीं होता। त्वचा छिलने पर संक्रमण की आशंका का आकलन जरूरी है।
खून न निकलने पर भी खरोंच को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर टीका लगवाना संक्रमण से बचाव में अहम है। जिला अस्पताल में रोजाना कुत्ते के काटने के करीब 100 मामले आने का आंकड़ा समस्या की गंभीरता दिखाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी जा रही है।
निजी अस्पतालों में वैक्सीन की तीन से चार खुराक लगवाने पर करीब दो से पांच हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण का खर्च स्वास्थ्य विभाग उठाता है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कुत्तों के काटने के मामलों और वैक्सीन पर हर माह करीब 50 लाख रुपये खर्च होते हैं।
एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि रेबीज की आशंका में देरी जानलेवा हो सकती है। इसलिए कुत्ते के काटने के साथ नाखून से खरोंच लगने पर भी वैक्सीन लगवाना जरूरी है। लक्षण सामने आने के बाद रेबीज लगभग हमेशा जानलेवा होता है, जबकि समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकते हैं।