मुरादाबाद। केजीके कॉलेज प्रबंध समिति द्वारा प्राचार्य के बाद दो शिक्षकों को निलंबित करने की कार्रवाई सवालों के दायरे में आ गई है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का कहना है कि प्रबंधतंत्र के अनुमोदन की स्थिति को लेकर कुलपति जांच करवा रहे हैं। जब प्रबंधतंत्र की खुद के अनुमोदन की स्थिति स्पष्ट नहीं है तो वह निलंबन पर निलंबन कैसे कर रहे हैं, विश्वविद्यालय यह स्पष्ट करे।
केजीके कालेज के प्रबंधक विवेक खन्ना ने एक जुलाई को प्रो. अनिल चौहान को खेल सचिव के पद से हटाया था। इसकी शिकायत प्रो. अनिल चौहान ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी से की थी। इस मामले में क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी ने आठ जुलाई को प्रो. अनिल चौहान को पुन: क्रीड़ा विभाग सचिव पद पर नियुक्त करने के लिए कहा था। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. रीना वालिया का कहना है कि प्रबंधतंत्र ने उनको जानकारी दी थी कि प्रो. अनिल चौहान से क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन, आय-व्यय व खेल संबंधी परिसंपत्तियों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इसकी निष्पक्ष जांच के लिए प्रो. अनिल चौहान को क्रीड़ा विभाग सचिव पद से हटाया जाना आवश्यक है, अन्यथा वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इसी दौरान प्रबंध समिति ने प्रो. अनिल चौहान व भवन प्रभारी प्रो. अजय सिंह के विरुद्ध तीन सेवानिवृत्त शिक्षकों की जांच कमेटी बना दी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रबंध समिति ने खेल सचिव प्रो. अनिल चौहान के साथ भवन प्रभारी प्रो. अजय सिंह को निलंबित करने की संस्तुति भी कर दी। लेकिन यह रिपोर्ट और संस्तुति अभी तक कुलपति और क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी को नहीं भेजी गई है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. रीना वालिया ने कहा कि प्रो. अनिल चौहान के खिलाफ प्रबंधन द्वारा करवाई गई जांच की रिपोर्ट उनके साथ साझा नहीं की। बल्कि प्रो. अनिल को निलंबित कर दिया। इसके बाद भी निलंबन की कार्रवाई से उनको अवगत नहीं कराया गया है। वहीं, प्रो. अनिल चौहान के अपना पक्ष रखने के लिए उचित अवसर देने के आग्रह पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति ने मामले की जांच की थी।
प्रबंध समिति के अनुमोदन को लेकर चल रही जांच
महाविद्यालय की प्रबंध समिति की वैधता की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण वह जांच के दायरे में है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन माहेश्वरी ने 24 जुलाई को प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के निलंबन और प्रबंध समिति की वैधता की स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। प्रो. सचिन माहेश्वरी का कहना है कि जांच के लिए शासन से दो प्रतिनिधि लिए थे। समिति ने जांच रिपोर्ट जमा कर दी है। अभी मैं मुरादाबाद से बाहर हूं, इसलिए मैंने रिपोर्ट देखी नहीं है। निलंबन का प्रकरण शिक्षकों और प्रबंधन का मामला है। अभी दोनों शिक्षकों ने भी मुझे इस मामले के कागज नहीं दिए हैं। जब कागज आएंगे तो मैं देखूंगा।
वर्जन...
विश्वविद्यालय को पत्र लिखा है कि प्रबंध समिति के अनुमोदन की स्थिति स्पष्ट की जाए। अनुमोदन मिलने की स्थिति में ही वह निलंबन का अधिकार रखती है। अनुमोदन तीन महीने से विश्वविद्यालय स्तर पर अटका हुआ है। मेरी ओर से बनाई गई समिति प्रो. अनिल चौहान मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंप चुकी है। जब उच्च अधिकारियों द्वारा यह रिपोर्ट मांगी जाएगी तो मैं उस रिपोर्ट प्रस्तुत करूंगी।
डॉ. रीना वालिया, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी
जांच समिति की रिपोर्ट और प्राचार्य की संस्तुति के आधार पर निलंबन किया गया है। निलंबन सजा नहीं होती है। जब हमारा अनुमोदन हुआ था, उसमें निदेशक की ओर से क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी नॉमिनी थे। किसी को सहयोग करने के लिए बार-बार अनुमोदन का मुद्दा उठाया जा रहा है। प्रबंधतंत्र के रूप में आज हम कार्य कर रहे हैं। इसलिए प्राचार्य की संस्तुति के आधार पर निलंबन किया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज