मुरादाबाद। 90 प्रतिशत लोगों को बीमारी के उपचार में एंटीबायोटिक दवा की जरूरत ही नहीं है। जितनी अधिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग मामूली स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है, उतनी ही अधिक संभावना है कि वह अधिक गंभीर स्थितियों के इलाज के लिए अप्रभावी हो जाएं। यह बात शहर के तमाम डॉक्टर्स कह रहे हैं।
डाॅक्टरों के अनुसार, ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं, जब मरीजों पर जरूरत के समय एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं। इसे जानने के लिए डॉक्टरों ने मरीजों का ब्लड व यूरिन कल्चर जांच कराई। इसमें दवा के प्रति कम संवेदनशीलता व अधिक प्रतिरोध सामने आया। बाजार गंज निवासी सब्जी विक्रेता सोहनलाल के तीन साल के बेटे को एक साल पहले एलर्जिक इन्फेक्शन हुआ था। इस बार सर्दी में फिर परेशानी बढ़ी तो उन्होंने डॉक्टर को दिखाया।
तीन दिन दवा खाने के बाद बीमारी ठीक नहीं हुई तो डॉक्टर ने एंटीबायोटिक दी, फिर पाया कि असर नहीं हो रहा है। डॉक्टर ने जांच कराई तो दवा के प्रतिरोध की पुष्टि हुई। ऐसे तमाम उदाहरण बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि गंगल, डॉ. केजी गुप्ता, डॉ. शलभ अग्रवाल, डॉ. बीके दत्त, फिजीशियन डॉ. सौभाग्य मिश्रा, डॉ. नितिन अग्रवाल आदि के पास आए हैं। इनका कहना है कि झोलाछाप से इलाज कराने के कारण मरीजों को यह परेशानी हो रही है।
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100 में से 20 मरीजों पर एंटीबायोटिक बेअसर
फिजिशियन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मुरादाबाद शाखा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सौभाग्य मिश्रा का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत वाले 100 में से 20 मरीजों पर यह बेअसर साबित हो रही है।। सिपरोफ्लोक्सेसिन, ऑग्यूमेंटिन, मोनोसेफ आदि दवाओं में यह सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। डॉ. बीके दत्त ने बताया कि बच्चों में गला खराब व खांसी होने पर झोलाछाप मीरोपेनम इंजेक्शन दे रहे हैं। आशंका है कि आने वाले समय में यह लाइफ सेविंग ड्रग भी काम न करे।
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बैक्टीरिया की नई प्रजातियां हो रहीं विकसित
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. केजी गुप्ता ने बताया कि छाती में संक्रमण, बच्चों में कान का संक्रमण, वायरल इन्फेक्शन आदि में एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग नहीं होता है। एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग के कारण सुपरबग्स विकसित हो रहे हैं। यह बैक्टीरिया के वे प्रकार हैं जिन्होंने कई विभिन्न प्रकार के एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लिया है। इनमें एमआरएसए (मेथिसिलिन प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस), क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल (सी डिफ) आदि शामिल हैं।
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आखिरी बार नई एंटीबायोटिक दवा 2018 में लॉन्च हुई थी। आने वाले दिनों में भी नई दवाएं आने की संभावना कम है। हमारे पास गिनी चुनी एंटीबायोटिक हैं। यदि इनका बेवजह प्रयोग बंद नहीं हुआ तो लोगों को बहुत परेशानी होगी।
- डॉ. सौभाग्य मिश्रा, फिजीशियन
बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोध विकसित हो रहा है। यह चिंता का विषय है। एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्टर के पर्चे के बिना मेडिकल स्टोर से मिलनी ही नहीं चाहिए, जबकि यह कोई भी केमिस्ट आसानी से दे देता है।
- डॉ. बीके दत्त, बाल रोग विशेषज्ञ