पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मियों के मानदेय के करोड़ों रुपये का घपला हो गया है। यह घपला किसी और ने नहीं विद्युत वितरण निगम में कार्य कर रही पंजीकृत ठेकेदारों की फर्म ने किया है।
पूरे निगम के करीब 1600 संविदा कर्मचारियों को प्रतिमाह पांच हजार रुपये का वेतन दिया जाता है। पिछले नौ माह से इन ठेकेदारों ने संविदा कर्मियों को करीब 7.20 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। संविदा कर्मियों के दबाव बनाने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी जा रही है।
निगम के अफसरों ने भी ठेकेदारों पर दबाव नहीं बनाया है। कुछ ठेकेदारों का तो कान्ट्रेक्ट भी खत्म हो गया है। तहसील दिवसों में शिकायतें होने के बाद भी संविदा कर्मियोें का भुगतान नहीं हो रहा है।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में बिजली घरों में सब स्टेशन आपरेटर, लाइनमैन और हेल्पर रखने के लिए पंजीकृत फर्मों को टेंडर के द्वारा कान्ट्रेक्ट किया जाता है। यह ठेकेदार सब स्टेशन आपरेटर, लाइनमैन और हेल्पर रखते हैं। लेकिन इनका वेतन निगम की संविदा में तय है।
जैसे एसएसओ के लिए 5200 से 6818, लाइनमैन को 4500 से 5000 और हेल्पर के लिए 4000 रुपये प्रतिमाह। कर्मचारियों के लिए ईपीएफ और ईएसआई भी जमा कराने की जिम्मेदारी है, ताकि कोई हादसा होने पर संविदा कर्मचारी के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
लेकिन पंजीकृत ठेकेदारों ने पिछले नौ माह का वेतन संविदा कर्मियों को नहीं दिया है। 1600 कर्मचारियों का नौ माह का वेतन करीब 7.20 करोड़ है। इसके लिए संविदा कर्मियों ने तहसील दिवस में तमाम शिकायतें दी हैं। दबाव बनाने पर पंजीकृत ठेकेदार नौकरी से हटाने की धमकी दे रहे हैं।