मुरादाबाद। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर तीसरे दिन भी बिजली कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ आंदोलन जारी रहा। विद्युत कर्मी व अभियंता काली पट्टी बांधकर कार्य करते रहे। पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी व अभियंता यह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को दिनभर काली पट्टी बांधकर काम करने के बाद शाम को सभी मुख्य अभियंता कार्यालय पर एकत्र हुए। यहां विरोध सभा की गई। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने निजीकरण के लिए बिडिंग डॉक्यूमेंट को अनुमति नहीं दी है तो किस दस्तावेज के आधार पर निजीकरण किया जा रहा है। भारत सरकार ने 20 सितंबर 2020 को विद्युत वितरण के निजीकरण के लिए एक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया था। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट पर सभी हितधारकों की आपत्तियां मांगी थीं। मंत्रालय ने अभी तक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट को अंतिम रूप नहीं दिया है। केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय ड्राफ्ट पर आई आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार कर रहा है। ऐसे में पॉवर कारपोरेशन की ओर से निजीकरण के लिए जारी आरएफपी डॉक्यूमेंट में 2020 के ड्राफ्ट के आधार पर निजीकरण करना पूरी तरह गलत है। वक्ताओं ने कहा कि जब यह डॉक्यूमेंट भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के विचारों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करता तो इसका उल्लेख कर निजीकरण करने का साफ मतलब है कि निजी घरानों का नाम पहले ही तय कर लिया गया है और बिडिंग एक धोखा है।बिजली निगमों की परिसंपत्तियां जो करोड़ों रुपये की हैं, उनका मूल्यांकन कराए बिना किस आधार पर इसकी रिजर्व प्राइस तय की गई है। 42 जनपदों की हजारों एकड़ जमीन मात्र एक रुपये की वार्षिक लीज पर निजी घरानों को देने का प्रस्ताव है। अभियंताओं, जूनियर इंजीनियरों व कर्मचारियों ने कहा कि सभी मिलकर आंदोलन कर रहे हैं। किसी भी स्थिति में निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। इस मौके पर नरेंद्र सिंह, रोहित शर्मा, अवधेश प्रजापति, राणा प्रताप, संदीप यादव, सतेंद्र मौर्य, अनिल कुमार, वीरेंद्र कुमार, इरफान, सदर सागर आदि मौजूद रहे।