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नगर निगम की जमीन पर कब्जे को लेकर बखेड़ा

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मुरादाबाद। शहर के मैनाठेर में नगर निगम की जमीन में इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग स्टेशन का निर्माण शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। चार परिवार करीब 700 गज जमीन को अपना बताते हुए निर्माण स्थल पर टेंट लगाकर बैठ गए। उन्होंने चार्जिंग स्टेशन निर्माण की नींव का काम रुकवाकर हंगामा शुरू कर दिया। निर्माण संस्था की सूचना पर नगर निगम अफसरों में खलबली मच गई। अपर नगर आयुुक्त सहित निगम के सुरक्षा विभाग के प्रवर्तन दल मौके पर पहुंचा। करीब एक घंटा हंगामा चला। बाद में निगम अफसरों ने सख्ती दिखाते हुए प्रदर्शन करने वालों को वहां से हटाकर काम शुरू कराया।
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शहर में स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक बसें चलाई जानी हैं। बसों का संचालन परिवहन विभाग करेगा। इन बसों के लिए वर्कशॉप और चार्जिंग स्टेशन के लिए नगर निगम ने मैनाठेर में 1.7 एकड़ जमीन दी है। इस जमीन पर सोमवार को जलनिगम की कार्यदायी संस्था सीएंडएस ने निर्माण शुरू किया। लेबर ने जैसे ही वहां नींव की खुदाई शुरू की आसपास रहने वाले कुछ परिवारों ने यहां पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया। चार परिवारों ने अपने बैनामों के कागजात भी दिखाए। उनका कहना था कि चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए दी गई जमीन में 700 गज जमीन उनकी है इसलिए यहां निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने कह दिया कि हम अपनी जमीन पर निर्माण नहीं होने देंगे। यह लोग वहां पर टेंट लगाकर अपने बीवी बच्चों सहित बैठ गए। जल निगम के अधिकारियों ने मामले की जानकारी निगम अधिकारियों को दी तो उनमें खलबली मच गई। अपर आयुक्त अनिल कुमार सिंह तुरंत सहायक नगर आयुक्त दीपशिखा, निगम के सुरक्षा दल के सीओ और प्रवर्तन दल विभाग की फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। टीम ने वहां हंगामा कर रहे परिवारों से वार्ता की। विरोध करने वालों ने कासिम, जरीना, जरीफ, फिरासत के नाम के बैनामे दिखाए और कहा कि ये जमीन उनकी है। अपर नगर आयुक्त ने राजस्व टीम से इसे चेक कराया। निगम के अधिकारियों ने लोगों से कहा कि वे जो बैनामे दिखा रहे हैं वे 2014-15 के हैं, जबकि नगर निगम ने करीब दो साल पहले इस जमीन की तारबंदी की थी। यदि उनके बैनामे पहले हो चुके हैं तो उन्हें तारबंदी के वक्त भी आगे आना चाहिए था, लेकिन उस वक्त कोई सामने नहीं आया।
जाओ बैनामा करने वालों को बुलाकर लाओ
अपर नगर आयुक्त अनिल सिंह के अनुसार चार लोगों के नाम के जो बैनामे उन्हें दिखाए गए उस पर जमीन का खसरा नंबर तो एक ही है लेकिन खंड अलग है यानी उनकी जमीन दूसरी जगह है। विरोध करने वालों ने दावा किया कि जब उन्होंने बैनामा कराया था तो बैनामा करने वालों ने उन्हें यही जगह दिखाई गई थी और हम लोग इसी को अपना मान रहे थे। अपर नगर आयुक्त ने लोगों से कहा कि वह बैनामा करने वालों को बुलाएं। इस पर लोगों ने उन्हें फोन भी किया लेकिन कोई नहीं आया। इसके बाद अधिकारियों ने लोगों को समझाया और कहा कि यह जमीन सरकार की है। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि समझाने के बाद लोग चले गए हैं।
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स्मार्ट सिटी के अंतर्गत शहर के इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए वर्कशॉप और चार्जिंग स्टेशन के लिए निगम ने जमीन दी है। इस पर जलनिगम की संस्था निर्माण करेगी। करीब पांच करोड़ का प्रोजेक्ट है। सोमवार को निर्माण शुरू होते ही लोगों ने 700 गज जमीन को अपना बताकर विरोध किया। उनके बैनामे चेक किए गए तो उनकी भूमि दूसरी जगह है। उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया है। यदि यह लोग सरकारी काम में बाधा डालेंगे तो निगम कानूनी कार्रवाई करेगा।
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- अनिल सिंह, अपर नगर आयुक्त
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