मुरादाबाद। माहे रमजान के तीसरे जुमे (शुक्रवार) को शहर की सभी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ रही। अकीदतमंद रोजेदारों ने मस्जिदों में समय से पहुंच कर जुमे की नमाज अदा की। बाद नमाज सभी ने मुल्क की तरक्की, देश में अमन, चैन व भाईचारा बनाए रखने की दुआ की। शहर की जामा मस्जिद में सबसे अधिक रोजेदार, नमाजियों की भीड़ रही।
माहे रमजान का मझला रोजा होने के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह से ही जुमे की नमाज और शाम को इफ्तारी आदि की तैयारी में जुट गए थे। जुमे की नमाज के लिए लोगों का समय से आधा घंटे पहले से ही मस्जिदों में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जामा मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदें जुमे की नमाज के समय फुल नजर आईं। शहर की जामा मस्जिद में नायब शहर इमाम सैयद फहद अली ने जुमे की नमाज अदा कराई। इससे पहले उन्होंने माहे रमजान की फजीलत बयां की। फितरा व जकात पर भी विस्तार से रोशनी डाली। बाद नमाज सभी ने खुदा की बारगाह में हाथ उठाकर देश में अमन, चैन, भाईचारा और तरक्की की दुआ की।
इसके अलावा शहर की ईदगाह रोड स्थित जरनैल वाली मस्जिद, लाजपतनगर स्थित बिलाल वाली मस्जिद, शम्शी मस्जिद. गलशदीद चौराहा स्थित पुत्तन शहीद मस्जिद, गलशहीद स्थित मस्जिद जामेउल हुदा, प्रिंस रोड स्थित चांद वाली मस्जिद, पक्की सराय स्थित दादा वाली मस्जिद, ईदगाह स्थित एक रात वाली मस्जिद, हाफिज बन्ने की पुलिया स्थित मुगलों वाली मस्जिद, जीआईसी चौराहा स्थित किले वाली मस्जिद, मोहल्ला पीरजादा स्थित रोजे वाली मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदें भी जुमे की नमाज के मौके पर नमाजियों से फुल नजर आईं।
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फितरा
जुमे की नमाज से पहले अकीदतमंदों के खिताब करते हुए नायब शहर इमाम सैयद फहद अली ने कहा कि रोजेदार कितना ही एहतमाम कर ले रोजे के दौरान कुछ ना कुछ कोताही हो ही जाती है। खाने-पीने और रोजा तोड़ने वाली बातों से बचना तो आसान होता है, लेकिन फिजूल (बेकार) की बातों से मुकम्मल बचना मुश्किल होता है। इस लिए इस तरह की गलतियों से बचने के लिए रमजान उल मुबारक के खत्म पर सदका तुल फितर को जरूरी करार दिया गया है। जो रोजेदारों के लिए बुरी बातों से पाकीजगी का जरिया और गरीबों के लिए खाने में मददगार बनता है। परिवार के प्रत्येक सदस्य पर पौने दो किलो गेहूं, आटा अथवा उसकी बाजार में कीमत के बराबर फितरा अदा करना होता है।
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जकात (दान)
इस्लाम में रमजान के पाक महीने में हर हैसियतमंद मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है। जिसे जकात कहते हैं। जकात और फितरा गरीबों को देना होता है। इसके लिए सबसे पहले जरूरतमंद अगर कोई रिश्तेदार है तो उसे देना चाहिए। उसके बाद पड़ोसी, फिर अन्य जरूरतमंद को दिया जाता है।
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सामूहिक रोजा इफ्तार कल
हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से शहर के अंसार इंटर कॉलेज में रविवार सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु व प्रशासनिक अधिकारी मौैजूद रहेंगे। यह जानकारी सोसायटी के अध्यक्ष नोमान मंसूरी ने दी।