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Moradabad News: अपनी ही फसल से बेजार हो रहे आलू किसान

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मुरादाबाद। नया आलू बाजार में आ गया है लेकिन किसान अपनी फसल की दुर्दशा से बेजार है। मंडी में किसान की लागत भी नहीं निकल पा रही है। शनिवार और रविवार को नवीन फल एवं सब्जी मंडी मुरादाबाद में किसानों को 80 से 90 रुपए प्रति बोरी (50 किलो) के भाव आलू बेचना पड़ा है। जिससे वह भारी नुकसान में हैं।
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नए आलू की खोदाई चल रही है, किसान भंडारण की तत्कालिक सुविधा नहीं होने और धन की आवश्यकता के चलते सीधे खेत से मंडी में ला रहे हैं, जिसके कारण मंडी में आलू की अधिकता हो गई है। जिसके कारण खासकर पुखराज किस्म के आलू की बेकद्री शुरू हो गई है। चिप्सोना किस्म के आलू का बाजार फिर भी सही है लेकिन लागत उसकी भी नहीं निकल रही है, क्योंकि पुखराज की अपेक्षा चिप्सोना आलू की पैदावार कम और लागत अधिक है।

खोदाई शुरू होने के बाद गिरे भाव
- जब से आलू की खोदाई शुरू हुई है, तब से आलू के भाव गिर गए हैं। किसान खेत से सीधे मंडी में ही ला रहे हैं, क्योंकि त्योहार और शादियों का सीजन है, किसानों को पैसे की आवश्यकता है।
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-मोहम्मद अली, आढ़ती।

90 रुपये प्रति बोरी बिका आलू
- आज मेरी आढ़त पर ही खानपुर के किसान कुंवरपाल का पुखराज किस्म का आलू 90 रुपये व नौरतन का आलू 120 रुपए प्रति बोरी (50 किलो) बिका है, जिसमें किसान की लागत भी नहीं निकली।
- अकबर तुर्की, आढ़ती।

खपत से आवक अधिक होने से गिरे भाव
- चिप्सोना आलू का भाव भी 220 रुपए प्रति बोरी है, इसकी पैदावार कम होती है, लागत अधिक लगती है, लेकिन इन दिनों जितनी खपत है, उससे अधिक आवक है, इसलिए भाव गिर गया है।
-जगदीश सिंह, आढ़ती।

खेत से मंडी तक लाने तक खर्च हो जाते हैं 60 रुपए बोरी
- खेत में बीज से लेकर पैदा होने तक की लागत के अलावा 25 रुपए का वारदाना (खाली बोरी), 10 रुपए भराई, पांच रुपए लदाई और कम से कम मंडी तक पहुंचाने में 20 रुपए प्रति बोरी की लागत आ जाती है, जो कुल मिलाकर 60 रुपए प्रति बोरी पड़ती है, ऐसे में आलू पैदा करने की लागत कैसे निकलेगी।
- शराफत, किसान

आलू निर्यात की व्यवस्था करे सरकार
- चिप्सोना 30 से 35 बोरी तो पुखराज की पैदावार 50 से 60 बोरी प्रति बीघा तक होती है, खोदाई से पहले आलू का भाव तेज था लेकिन अब किसान का आलू तैयार हुआ तो भाव गिर गया। सरकार को इसकी उचित भंडारण या आलू के निर्यात की अच्छी व्यवस्था करनी चाहिए।
- शखावत हुसैन, किसान।

किसान को घाटे से बचाने को कदम उठाए सरकार
- इस बार खेतों में किसानों ने आलू अधिक लगाया, बाहरी मंडियों में ले जाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, भंडारण स्टोर कम है, मुरादाबाद जिले में कोई बड़ी मंडी नहीं है। जिसके कारण आलू के किसान बर्बाद हो रहे हैं। इसके लिए सरकार को ही कोई अहम कदम उठाने चाहिए, ताकि किसान घाटे से बच सकें।
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- रामपाल सैनी, किसान
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