नासूर बने मुरादाबाद के प्रदूषण को काम करने के लिए दस विभाग ताल ठोंक रहे हैं पर विडंबना देखिए कि विश्व के सबसे प्रदूषित तीस शहरों में मुरादाबाद भी शामिल हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश और एनजीटी की लगातार फटकार के बावजूद मुरादाबाद का प्रदूषण विभाग कम नहीं कर पा रहे हैं। इस लापरवाही का असर यह है कि यहां के वायु गुणवत्ता सूचकांक का ग्राफ अक्सर काफी बढ़ जाता है और लोगों के लिए यह स्थिति बेहद खराब है।
मुरादाबाद का वायु प्रदूषण अभी तक देश में ही स्थान बनाता था, लेकिन गत दिनों जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार अब दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में भी गिनती हो गई है। एक वर्ष से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर एक्शन प्लान जारी हुआ था। इसमें दस विभागों को मिलकर कार्य करना था। पीतल की अवैध भट्टियां, ई-कचरा, प्रमुख मार्गों पर लगने वाला जाम और निर्माण कार्यों की वजह से हवा में प्रदूषित कणों में बढ़ोतरी होती रहती है। एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों का धरातल पर सफल क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
दावे कुछ और, आंकड़े कुछ और
अधिकारियों का दावा है कि सभी विभाग कार्य कर रहे हैं, लेकिन ताजा स्थिति इन आंकड़ों पर भारी पड़ रही है। गुुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट एयर क्वालिटी डॉट काम के अनुसार 163 एक्यूआई में पीएम 2.5 का स्तर 80 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, पीएम 10 का स्तर 123 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, नाइट्रोजन ऑक्साइड का स्तर 29 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, सल्फर डाई ऑक्साइड का स्तर 20 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर 14 सौ माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। वेबसाइट की टाइम लाइन के अनुसार प्रदूषण की यह स्थिति स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक है।
धरातल पर स्थिति उलट
गत वर्ष वायु प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक्शन प्लान तैयार किया था। इसमें नगर निगम नगर पालिकाएं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सिंचाई विभाग, राष्ट्रीय राज्यमार्ग, एमडीए, यूपीएसआईडीसी, परिवहन विभाग, कृषि, वन, लोनिवि विभाग को साथ मिलकर कार्य करना था। अफसरों पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ आम लोगों को भी जागरूक करने की जिम्मेदारी थी। अधिकारियों की बैठक में शहरी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण की कार्य योजना बनाई गई थी। इसके साथ ही जिन स्थानों पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वहां पर ग्रीन कवर डाला जाना था, लेकिन धरातल पर स्थिति एकदम उलट है। निर्माण कार्य करते समय दिशा-निर्देशों की जमकर अवहेलना की जा रही है।
खुदी सड़कों से उड़ रही धूल
शहर में सीवर लाइन की खुदाई के दौरान काफी धूल उड़ती है। जगह-जगह सड़कें टूटी पड़ी हैं। इससे वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। जबकि इस मामले में जल निगम को निर्देश दिए गए थे कि जिन स्थानों पर सीवर लाइन खुदाई का कार्य किया जाए, वहां लगातार पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि धूल को उड़ने से रोका जा सके।
पीतल भट्ठियां उगल रही धुआं
लाकड़ी फाजलपुर, लालबाग, जामा मस्जिद क्षेत्र में पीतल की भट्टियां और फैक्ट्रियों काला धुआं उगल रही हैं। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर में बढ़ोतरी हो रही है। हवा में खतरनाक सूक्ष्म कण पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा बढ़ रही है। यह खतरनाक कण इतने सूक्ष्म हैं, कि सांस के जरिए ये लोगों के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इससे खतरनाक बीमारियों की संभावना भी बढ़ रही है। इसके बावजूद धुआं उगलती फैक्ट्रियों पर लगाम नहीं लग पा रही है।