जामा मस्जिद के सर्वे के बाद हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी गर्मी तेज हो गई है। भाजपा और सपा नेताओं के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच, संभल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने 10 जनवरी 2025 तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने जिले में धारा 163 के तहत 10 जनवरी तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है। आदेश के अनुसार, बाहरी जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन बिना अनुमति जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि संभल घटना के मुख्य अपराधी समाजवादी पार्टी है। उपचुनाव में हार का गुस्सा वह हिंसा भड़काकर निकाल रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि कि संभल के अपराधियों को सपा का संरक्षण मिला हुआ है। अखिलेश यादव को जनता से माफी मांगनी चाहिए।
सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंसा के बाद प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। जिन पांच लोगों की माैत हुई है उनके परिवार के लोग बेहद दुखी हैं। हम उनसे मिलकर सांत्वना देना चाहते हैं और घायलों से मुलाकात करेंगे। हमारी मांग है कि वहां के डीएम और एसपी को तत्काल हटाया जाए। मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से कराई जाए।
संभल के एडिशनल एसपी श्रीश चंद्र ने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण है, कहीं कोई घटना नहीं हुई है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि हमें शांति बनाए रखनी चाहिए और अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए। प्रशासन ने हिंसाग्रस्त इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और जनता से संयम बरतने की अपील की है।
मुरादाबाद में पूर्व मंत्री कमाल अख्तर, विधायक पिंकी यादव, जिला अध्यक्ष जयवीर यादव समेत 10 सपा नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सभी पुलिस को चकमा देकर संभल जाने की कोशिश कर रहे थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा गठित 15 सदस्यीय टीम को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे की अगुवाई में संभल हिंसा की जांच करनी थी। पुलिस ने टीम को मुरादाबाद और मुंडापांडे में रोक दिया।